उद्धव को घर और घाट दोनों के लाले पड़े

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को अपने ही लिए हुए फैसले वापिस लेने पड़ रहे हैं। यह सारा मामला राज ठाकरे की महारैली के बाद शुरू हुआ जब महाराष्ट्र में लाखों की संख्या में लोग राज ठाकरे की मनसे में जाने को उद्द्यत हो उठे और तो और शिव सेना के कई विधायकों तक को राज ठाकरे में बाला साहब की छवि दिखाई पड़ी। कमजोर पड़ती शिवसेना पर भला हावी होने का मौका एनसीपी और काँग्रेस क्यों छोड़ते। उधर उद्धव ने स्वयं को राष्ट्रवादी दिखाते हुए कुछ फैसले कॉंग्रेस और एनसीपी के खिलाफ जा कर लिए। अब ज्यों ही उनहोंने बांह मरोड़ी उद्धव ने एनआईए जांच का फैसला पलटने की बात कही, और अब एनपीआर भी खतरे के निशान के ऊपर बह रहा है।

मुंबई: 

महाराष्ट्र में तीन दलों की ठाकरे सरकार में एनपीआर के मुद्दे पर दो फाड़ हो गए हैं. शिवसेना NPR को जनगणना बताते हुए समर्थन करती दिख रही है, वहीं महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार की दो प्रमुख पार्टियां एनसीपी और कांग्रेस NPR को महाराष्ट्र में लागू करने के हक में नहीं हैं. NPR में केंद्र सरकार की प्रश्नों की सूची पर कांग्रेस और एनसीपी को आपत्ति है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने NPR पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि NPR मतलब जनगणना है. इससे डरने की जरूरत नहीं है. वहीं गठबंधन सरकार की प्रमुख पार्टी एनसीपी, NPR का विरोध कर रही है. 

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी सीएए और एनपीआर के मसले पर शिवसेना और एनसीपी की अलग राय होने की बात मानी है. NPR के बहाने अब कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना में मतभिन्नता सामने आई है. महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग के दौरे पर गए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा है कि हमारी सरकार में दरार डालने और सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है. CAA, NRC और NPR के मुद्दे को आगे किया जाता है. आप इस पर ध्यान ना दें. मैंने इस मुद्दे पर अपनी भूमिका स्पष्ट की है. मेरी भूमिका यानी सरकार की भूमिका. CAA लागू हुआ है, हमें इससे कोई परेशानी नहीं होने वाली है. 

ठाकरे ने कहा, ‘मैं आंगणेवाडी से गणपतीपुले पहुंचा तो वहां कुछ मुस्लिम समाज के लोग मुझे मिलने आए थे. मैंने उन्हें बताया कि NRC यहां नहीं आएगा लेकिन NPR से डरने की आवश्यकता नहीं है. NPR जनगणना है. जो हर 10 साल में होती है और वह जरूरी है. NRC और NRP अलग हैं. किसी भी नागरीक का हक छीना नहीं जाएगा, इसलिए डरें नहीं.’

जब मंगलवार को शरद पवार से CAA और NPR के मुद्दे पर सीएम उद्धव के रुख पर सवाल पूछा गया तो पवार ने माना कि CAA और NPR पर उद्धव और उनके विचार अलग हैं और हम मुख्यमंत्री को समझाएंगे. वहीं कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात का कहना है कि, CAA, NRC और NPR का कांग्रेस पार्टी विरोध करती है. इस पर हमारी भूमिका स्पष्ट है, समाज में भेद निर्माण करने वाले प्रयास का हम विरोध करते हैं. हमारे सहयोगी दलों से चर्चा करके हम अपनी भूमिका उन्हें समझाएंगे.

राजनीतिक विश्लेषक राहुल पांडे के मुताबिक, ‘तीनों पार्टियों के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में CAA, NRC और NPR को लेकर एकराय नहीं है. मुख्यमंत्री होने के नाते CAA को उद्धव ने समर्थन दिया है और NPR को वह जनगणना के तौर पर देखते हैं. वहीं कांग्रेस और एनसीपी CAA ,NCR और NPR को एक नजरिये से ही देखते हैं. हालांकि कई मुद्दो में अलग अलग राय हो सकती है लेकिन सरकार गिराने की नौबत नहीं आएगी.’ 

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