Sunday, May 10

पुरनूर

नए और युवा पत्रकारों को चुनौती मानकर चलना प्रतियोगिता की भावना प्रगतिशील होने के लिए अनिवार्य है , जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार जो कि पंजाबी ट्रिब्यून में कार्यरत हैं पी पी वर्मा उभरती पत्रकार से बातचीत के दौरान माना कि समय के साथ साथ पत्रकारिता में बदलाव भी आए हैं जोकि काफी हद तक सकारात्मक हैं, और पुराने और वरिष्ठ पत्रकारों के मन में भी प्रतियोगिता की भावना जागृत हुई है जोकि आगे बढ़ने और नए आयामों को स्वीकार करने के लिए काफी सहायक है ।

पी पी वर्मा ने अनुभव साँझा करते हुए कहा पहले कुछ अखबारों में कई दुकानदार और अन्य वर्ग के लोग पत्रकार के रूप में काम करते थे लेकिन अब समय बदलने से पढ़े लिखे लोग इस क्षेत्र में आने लगे हैं । पंजाब के एक शहर का वाकया साँझा करते हुए वर्मा ने बताया कि एक बार सादात हसन मंटो के नाटकों पर आधारित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे रास्ते में रुक कर जिस दुकान पर चाय पी उस दुकानदार से संबंधित सभागार पता पूछा तो दुकानदार ने कहा “मैंने भी वही जाना है मेरे साथ ही चलना” । वर्मा ने उससे जब पूछा क्या वह भी वहां नाटक देखने के लिए जाएग तो दुकानदार ने बताया कि वह एक पत्रकार है इस नाते से कवरेज करने के लिए कार्य मैं जा रहा है ।जब वर्मा सभागार में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वह दुकानदार एस डी एम के साथ बैठा हिल मिल कर बातें कर रहा था और वह उस इलाके का जाना माना पत्रकार था ।

हालांकि बहुत कुछ बदल गया है लेकिन अभी भी सब कुछ नहीं बदला अभी भी ऐसे पत्रकार मौजूद है जो कम पढ़े लिखे हैं और अपने संस्थान और पत्रकारिता की निर्धारित शैली से अनभिज्ञ हैं। जबकि जरूरत है कि उन्हें का पूर्ण ज्ञान हो ।बहुत से तो अपनी गलतियों से सीख कर परिपक्व हो जाते हैं पर सभी मामलों में नहीं । पढ़ाई लिखाई और अनुभव दोनों ही पत्रकारिता के लिए जरूरी चीजें हैं।