आतंकियों और उनके समर्थकों सभी को सीधे गोली मारने की छूट सेना को मिलनी चाहिए।खून का बदला सिर्फ खून😡😡😡

Facebook से अशोक कुमार जी से साभार

सेनानायक चंदन सिंह ठाकुर जी की कलम से।

ये काश्मीर समस्या की जड़ फारूक अब्दुल्ला बोल रहे कि पाकिस्तान नहीं दोषी, काश्मीरी युवाओं से पूछो। ये वही अब्दुल्ला हैं जिनकी तीन पीढ़ियों ने काश्मीर को बर्बाद कर दिया और काश्मीर को अगला पाकिस्तान बनाने की बहाबी कट्टरपंथ की चाल चलती रही सारे काश्मीरी हिंदू सिख पलायन कर गये।
और अब पाकिस्तान युद्ध की मांग कर रहा है और भारत का नैतिक अधिकार है कि पाकिस्तान को युद्ध का पुरस्कार दिया जाय। शायद मोदी जी को यह मौका है जब अनुच्छेद 370 हटा दे, बलूचिस्तान को आजाद कराये और काश्मीर में सभी भारतीयों के रहने बसने का अधिकार दे। क्या मोदी जी ऐसा करेंगे क्या मुल्क उनसे जो उम्मीदे पाल रखा है उसपर अब खरे उतरेंगे। शायद मोदीजी सरकार नहीं करेगी तो तारीख कभी माफ न करे। अभि तक की बीजेपी की केन्द्र सरकार काश्मीर मामले में कांग्रेस की पूर्व सरकार की नकल ही की है। 
जो गद्दार पत्थरबाजों को अपना अब्बा हजूर समझकर उनके मानवाधिकार की बात करते हैं क्या वो दोगले ये बतायेंगे कि इन आतंकियों को किसने यह सब करने का अवसर दिया। क्या अफजल और याकूब के हमदर्द नमक हराम हरामखोर यह बतायेंगे कि जो स्लीपर सेल ऐसी घिनौनी कायराना हरकत करते हैं उनके लिए जो सडकों पर उतरतै है वो भी आतंकी है और जवानों और मासूमों के खून से इनके हाथ भी सने हैं।
जो मीडिया वाले जो वकील जो बदमिजाज बुद्धिजीवी इनकी सार्वजनिक और न्यायालय में पैरवी करते हैं वो भी जवानों के खून की शहादत के दोषी हैं। जेएनयू में कन्हैया जैसे गद्दार जो भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाते हैं वो भी जवानों के नाहक खून के दोषी है। यदि चीन होता तो अबतक आतंकवाद और आतंकियों और उनके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थकों को दोजख भेज दिया गया होता।वैसे गद्दारी तो भारतीय लोकतंत्र की राजनीति के मुख्यधारा में भी शामिल है 😡😡😡
सडक पर खडा कर इन सभी को सीधे गोली मार दी जाती।
लेकिन यह मजबूत भारत वर्ष है जहां बहुत सारे गद्दार हरामखोर दोगले जिनके खून में दोष है वो पैदा है जिनके समर्थन से आतंकी लोगो को घुसपैठ करने छिपने और कायराना हत्या करने का मौका मिलता है। भारत को एक मजबूत कठोर निर्णय लेने वाली ताकतवर बहुमत की केन्द्र सरकार और कद्दावर नेता की जरूरत है। बहुत दुखद घटना। शहीदों को नमन उनके परिवार को नमन और गद्दारों के लिए फांसी मौत की मांग करता हूं।
भारत की संकल्पना ऐसे कायराना हरकत से कमजोर होने वाली नहीं है।
बाहर और अंदर दोनों दुश्मनों गद्दारों का सफाया ही एकमात्र समाधान है।

जय जवान। जय हिंद के जनगण मन।

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