300 मीटर ऊंचे सौर ऊर्जा से चलायमन टावर एयर प्यूरिफाइर आज की आवश्यकता


दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने के लिए आईआईटी से पढे लिखे मुख्य मंत्री की नहीं अपितु नीति ओर नियत की आवश्यकता है। 


जब दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने की बात आती है तो विकल्पों पर नहीं राजनीति पर अधिक ध्यान दिया जाता है। हमारे आईआईटी से पढे हुए ओर आईआरएस की नौकरी छोड़ चुके मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल के पास समस्याओं के लिए कोई समाधान नहीं होने पर दोषारोपण की राजनीति करते हैं। जब उससे भी बात नहीं बनती तो गुपचुप विदेश भ्रमण पर निकाल जाते हैं।

आज जब दिल्ली और एनसीआर जब वायु प्रदूषण की भीषण समस्या से फिर जूझ रहे हैं तो हमें चीन के उस एयर प्यूरीफायर के बारे में जानना चाहिए, जो दुनिया का सबसे बड़ा प्यूरीफायर भी है.

ये प्यूरीफायर चीन के शांक्शी प्रांत के झियान शहर में एक टॉवर पर लगाया गया है. ये 330 फीट ऊंचा एअर-प्यूरीफायर है. दुनिया में इतना बड़ा प्यूरीफायर और कहीं नहीं है. इसे चीन के दिमाग की उपज भी कह सकते हैं.

पूरे शहर की हवा साफ रखने की क्षमता
लगाया गया. ये पूरे शहर की हवा को साफ करने की क्षमता रखता है. ये रोज एक करोड़ घनमीटर हवा को साफ करता है. इसके लगने के बाद शहर की साफ हवा की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है. इस शहर की स्थिति इस एयर प्यूरीफायर लगने से पहले ये थी कि शहर का शख्स हवा में 21 सिगरेट के बराबर विषैले तत्व हवा के साथ पी रहा था.

वैज्ञानिक इसका पूरा काम देखते हैं. ये जब से लगाया गया है तब से दस किलोमीटर के रेंज की हवा को साफ रखता है. केवल यही नहीं ये प्यूरीफायर टॉवर हवा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ स्मॉग को भी 15 से 20 प्रतिशत तक कम करता है.

सारी प्रणाली सौर ऊर्जा से नियंत्रित
टॉवर की सारी कार्य प्रणाली सौर ऊर्जा से नियंत्रित है. इसलिए इसको बाहर से कोई बिजली नहीं दी जाती. ये सूरज से मिलने वाली ऊर्जा से खुद ब खुद काम करता है. जो खबरें हैं, उसके अनुसार इसके रिजल्ट्स को लेकर चीन की साइंस एकेडमी के वैज्ञानिक संतुष्ट हैं.

वैज्ञानिक कहते हैं कि अभी तो ये शुरुआत है. इस टॉवर से आने वाले समय में और बेहतर रिजल्ट मिलने लगेंगे. वैज्ञानिक आने वाले समय इसकी क्षमता और ऊंचाई दोनों बढाएंगे ताकि ये 30 किलोमीटर रेंज की हवा को साफ रख सके. यानि अगर ऐसा प्यूरीफायर किसी छोटे शहर में लगा दिया जाए तो आराम से पूरे शहर को हेल्दी हवा देता रहेगा.

दो साल में बना प्रोजेक्ट

कभी ये हाल था कि इस शहर में सर्दियों के दौरान इतना ज्यादा प्रदूषण होता था कि लोगों का सांस लेना दुश्वार हो चुका था. मुख्य तौर पर इस शहर का हीटिंग सिस्टम कोयला आधारित था. इस प्रोजेक्ट को 2015 में शुरू किया गया और दो साल के भीतर इसे पूरा कर लिया गया.

वैसे बीजिंग में भी चीन ने इसी तरह का एक विशाल स्मॉग टॉवर बनवाया है. ये केवल बिजली से चलता है हालांकि इसकी क्षमता उतनी नहीं है, जितनी शांक्शी प्रांत के इस झियान शहर के टॉवर की.


झियान शहर के लोग महसूस करने लगे हैं कि अब जाड़े के दौरान जिस हवा में वो सांस ले रहे हैं, वो बेहतर है और इससे वो खुद में अच्छा फील कर रहे हैं.

 

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