Saturday, March 14

कुल्लड़पुर में आयोजित कार्यक्रम में बीडीपीओं संजय टांक ने शिलफलकम पर पुष्प अर्पित कर उद्घाटन किया व पौधारोपण किया गया।    …

Read More

छात्राओं को सेनेटरी पैड्स बाटें पार्षद ने   डेमोक्रेटिक फ्रंट, चण्डीगढ़- 10 अगस्त : वार्ड नं. 9 से कांग्रेस पार्षद ग़ुरबक्श रावत…

Read More

सुभाष कोहली, डेमोक्रेटिक फ्रंट, कालका – 10 अगस्त : भाजपा राज में भाजपा के नेता बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा तो…

Read More

सुशील पण्डित, डेमोक्रेटिक फ्रंट, यमुनानगर – 10 अगस्त : जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग वासों के सौजन्य से दारुल उलूम इमदादिया मदरसा में…

Read More

डेमोक्रेटिक फ्रंट, चण्डीगढ़- 10 अगस्त : देश के युवाओं में कार्डियक अरेस्ट के मामले काफी ज्यादा बढ़ रहे हैं, ऐसे में लोगों के बीच अवेयरनेस फैलाने की जरूरत है. हाल के कुछ आंकड़े बहुत ही डरावने हैं जिनसे पता चलता है कि यंग एज ग्रुप में मौत का एक बड़ा कारण कार्डियक अरेस्ट बन गया है. लिहाजा, ये जरूरी है कि लोगों को कार्डियक अरेस्ट के लक्षणों, संकेत और बचाव के तरीकों की जानकारी दी जाए ताकि वो इस जानलेवा परेशानी से खुद को बचा सकें.कार्डियक अरेस्ट एक क्रिटिकल मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें हृदय ब्लड को प्रभावी ढंग से पंप करना बंद कर देता है, और मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, होश खो बैठता है. इसमें मरीज अचानक गिर जाता है, पल्स रुक जाती हैं और सांस भी थमने लगता है. अगर तुरंत मेडिकल हेल्प न मिले तो मरीज के बचने की संभावना खत्म हो जाती है और महज 10 मिनट के अंदर मरीज की मौत हो जाती है. कार्डियक अरेस्ट होने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं. लगभग 85% मामलों में, कार्डियक अरेस्ट पहले से मौजूद हार्ट की समस्याओं जैसे कार्डियोमायोपैथी या पिछले दिल के दौरे के कारण होता है. जिन मरीजों के हार्ट की पंपिंग क्षमता कम होती है और इजेक्शन फ्रैक्शन 35% से कम होता है, उन्हें कार्डियक अरेस्ट का ज्यादा खतरा रहता है. कुछ मामलों में कार्डियक अरेस्ट वंशानुगत हार्ट डिजीज जैसे हाइपरट्रोफिक कार्डियोमायोपैथी, क्यूटी प्रोलॉन्गेशन, ब्रूगाडा सिंड्रोम और एराइथमॉजेनिक राइट वेंट्रिकुलर डिस्प्लेसिया की दिक्कत वालों को होता है. इन परेशानियों का टाइम पर पता लगाने की जरूरत है, जिसके लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी (ईसीजी), ईकोकार्डियोग्राफी कराएं और कार्डियक फिजिशियन को दिखाएं. फोर्टिस हार्ट एंड वैस्कुलर इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉक्टर टीएस क्लेर ने इस बात पर जोर दिया कि कार्डियोपल्मोनरी रिसकिटशन (सीपीआर) को तत्काल मैनेज करना कार्डियक अरेस्ट के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है. इसके अलावा, बिजली के झटके के माध्यम से डिफाइब्रिलेशन और एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट की मदद से मरीज से बच पाने की संभावना बढ़ जाती है. भारत में युवा आबादी के बीच जो कार्डियक अरेस्ट के मामले बढ़ रहे हैं उनमें सबसे बड़ा कारण खराब लाइफस्टाइल है. युवाओं की खाने-पीने की आदतें सही नहीं हैं, प्रोसेस फूड ज्यादा खा रहे हैं, शुगर का इनटेक ज्यादा है, हाई ग्लाइसेमिक कार्बोहाइड्रेट्स ले रहे हैं, उनकी रूटीन भी सही नहीं है, मोटापा बढ़ रहा है, तंबाकू और शराब का सेवन ज्यादा करते हैं, स्ट्रेस ज्यादा है. इन सब तमाम कारणों के चलते युवा हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं. हाल में ये भी सामने आया है कि गलत तरीके से एक्सरसाइज और मसल गेन के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेने से भी हार्ट पर असर पड़ता है, खासकर उन युवाओं में जो इसे ज्यादा मात्रा में लेते हैं.

Read More

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति के बारे में जानने के लिए उसकी राशि ही काफी होती है। राशि से उस या…

Read More

पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। शास्त्र कहते हैं कि…

Read More

डूब मरने वाली बात, हरियाणा व पानीपत के किसी एक भी हिन्दू ने शहीद अभिषेक को 1 रुपये की मदद नही कि…

Read More

टोडा ग्रामवासियों ने अपने गांव में बाढ़ से प्रभावित हुई दो पुलिया निर्माण कार्य पूरा करने पर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और प्रदेश…

Read More