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एम डी पेंशन भोगियों के मेडिकल बिल नही कर रहे पासमाननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की भी दिखा रहे ठेंगाबीमार पेंशनभोगी इलाज दवाई के लिए हुए मोहताज डेमोक्रेटिक फ्रंट, चण्डीगढ़ – 09 अगस्त : पंजाब राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक लिमिटेड, चंडीगढ़ से रिटायर्ड पेंशनधारियों ने बैंक के एम डी गुलप्रीत सिंह औलख ( आई ए एस) पर सभी पेंशनभोगियों को मारने के इरादे से 300 पारिवारिक पेंशनभोगियों (विधवा महिलाओं) सहित 900 पेंशनभोगियों के मुंह से दवा छीन लेने के आरोप लगाए हैं। एम डी ने बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को भी दरकिनार कर दिया है, जिसमे सभी पेंशनभोगियों को उनकी तुरंत से पेंशन बहाली के निर्देश जारी किए गए थे। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में अपनी व्यथा सुनाते हुए कन्वीनर राजिंदर मिल्लू ने बताया कि राज्य सहकारी कृषि विकास बैंक लिमिटेड से रिटायर्ड सभी पेंशन भोगी पिछले लगभग 15 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें पेंशन नही मिल रही, बल्कि उनके मेडिकल बिल भी पास नही किए जा रहे। जिससे कि उन्हें मिलने वाली मेडिकल सुविधा से उन्हें वंचित किया जा रहा है अपने हितों और हक के लिए वो कई बार बैंक के एम डी एस. गुलप्रीत सिंह औलख आई.ए.एस. के आगे रोना रो चुके हैं। लेकिन सब व्यर्थ, एम डी उनकी मांग की तरफ ध्यान ही नही दे रहे। तब हार उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय का द्वार खटखटाया। माननीय अदालत ने उनकी शिकायत सुनने के बाद भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एसएलपी (सी) 1940-41, 2020 में पारित किया गया। भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एसएलपी (सी) 1940-41, 2020 में दिनांक 11.01. 2022 के फैसले के तहत कानून के तहत स्वीकार्य पेंशन के हमारे अधिकार को बरकरार रखा है। इसके बाद इस फैसले के खिलाफ समीक्षा भी 12.04.2022 को खारिज कर दी गई। फैसले के कार्यान्वयन के लिए समय बढ़ाने की मांग करने वाले बैंक के विविध आवेदन को भी भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 29.08.2022 के आदेश के तहत अनुमति नहीं दी थी। लेकिन बैंक ने हमें 1996 के वेतनमान के आधार पर पेंशन देना शुरू कर दिया, हम सभी 70 से 93 वर्ष की आयु के हैं और विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं और हममें से कई लोगों को अपने शरीर के विभिन्न अंगों की तत्काल बड़ी सर्जरी की आवश्यकता है। हम 11.05.2023 और 05.06.2023 को एस. गुलप्रीत सिंह औलख आईएएस एमडी से मिले, उन्होंने हमें कदम दर कदम फैसले को अक्षरश: लागू करने का आश्वासन दिया, लेकिन हमारे सभी लंबित चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति और निर्धारित चिकित्सा भत्ते में वृद्धि का वादा किया। अब बैंक ने पत्र दिनांक 21.07.2023 के माध्यम से दिनांक 11.01.2022 के निर्णय को लागू करने से इनकार कर दिया है और हमें 1996 के वेतनमान के आधार पर रुपये के निश्चित चिकित्सा भत्ते के साथ पेंशन देने पर अड़ा हुआ है। इनडोर रोगी चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति के बिना 350/- प्रति माह। भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका संख्या 34-35/2023 में दिनांक 21.04.2023 के आदेश के तहत हमें स्वतंत्रता प्रदान की थी। यदि बैंक निर्णय को अक्षरश: लागू नहीं करता है, तो बैंक के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए हम पूर्णतः स्वतंत्र हैं।
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