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डेमोक्रेटिक फ्रन्ट, अमृतसर – 28 जून : देश में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि, कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं बताया जा सकता है लेकिन तंबाकू का सेवन, शराब का सेवन और कुछ वायरस ऐसे होते हैं जिनके कारण शरीर में कैंसर पनपता है. कैंसर जीन, पर्यावरण और लाइफस्टाइल के अलग-अलग कारणों से मिलकर जन्म लेता है. आजकल कैंसर के केस इसलिए भी ज्यादा सामने आते हैं क्योंकि पहले की तुलना में अब इस रोग का पता लगाना आसान हो गया है. देश में कैंसर मरीजों का इलाज आज भी एक बड़ी चुनौती है. इसका एक कारण ये है कि यहां पर कैंसर का डायग्नोज एडवांस स्टेज में पता चल पाता है. इसलिए ये जरूरी है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक केंद्रों के डॉक्टरों को इसके लिए प्रशिक्षित किया जाए ताकि वो शुरुआती स्टेज में ही कैंसर को डिटेक्ट कर सकें और फिर सही वक्त पर मरीज का इलाज किया जा सके. कैंसर यूनिट काफी बड़ी होती है जिसमें मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और अन्य सेवाओं के लोग शामिल होते हैं. फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च हॉस्पिटल, गुरुग्राम में मेडिकल ऑन्कोलॉजी और हेमाटो- ऑन्कोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉक्टर अंकुर बहल ने बताया, ”कैंसर के मामलों में इलाज का खर्च वहन कर पाना एक बड़ा सवाल रहता है. ये वो बीमारी है जो बैंक खाते खाली करा देती है. लेकिन पिछले 5- 10 सालों में हमने देखा है कि अगर सही जगह और सही टेस्ट में खर्च करें तो इलाज का पैसा बचाया जा सकता है. कैंसर के लिए जब थेरेपी आई थीं तब उनका चार्ज काफी ज्यादा था. लेकिन फिलहाल कैंसर थेरेपी की कीमत में काफी गिरावट आई है. इसके अलावा आयुष्मान भारत स्कीम और कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को दिए जाने वाले मेडिकल इंश्योरेंस की मदद से मरीजों को काफी मदद मिली है. इस सबके बावजूद आज भी देश की एक बड़ी आबादी के लिए कैंसर का इलाज काफी मुश्किल है. हमें भारतीय लोगों के लिए इम्यूनोथेरेपी उपलब्ध कराने के टारगेट को हासिल करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना होगा.” हर तरह के डॉक्टर से सुसज्जित कैंसर केयर सेंटर मेट्रो शहरों में ही उपलब्ध रहते हैं. छोटे शहरों में आज भी समग्र कैंसर केयर सेंटर उपलब्ध नहीं हैं. हमारे देश में कैंसर के इलाज में रोग का डायग्नोज होना, फिर इलाज का खर्च और अस्पताल में सही इलाज, आज भी बड़ी चुनौती है. भारत में इस तरह की सुविधाओं का भारी अभाव है और इन्हें हासिल करने के लिए अभी मीलों का सफर तय करना होगा. डॉक्टर बहल ने आगे कहा, ”ज्यादातर मरीजों या उनके परिजनों के पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं होता है. जो लोग हेल्थ इंश्योरेंस लेते हैं उन्हें ये ध्यान रखने की जरूरत है कि उसमें कैंसर का इलाज भी शामिल हो. पिछले दो दशकों में भारत में कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं. मैं कहूंगा कि लगभग हर परिवार में कोई कैंसर मरीज या कैंसर से ठीक हो चुका मरीज
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