मुख्यमंत्री ने फाजिल्का ज़िले में बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़ा राशि के चैक सौंपे
उर्दू की शेयरो-शायरी के सिवाय मनप्रीत बादल के पास पंजाब और भाजपा के कल्याण के लिये कुछ नहीं होना
रिवायती पार्टियों की तरफ से पंजाब और लोक विरोधी पैंतरा अपनाने पर निशाना साधा
राकेश शाह, डेमोक्रेटिक फ्रंट, चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज कहा कि साधारण व्यक्ति के पुत्र को मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की सेवा करने का मौका मिला परन्तु रिवायती राजनैतिक पार्टियाँ इसको सहन नहीं कर पा रहीं जिस कारण वे उनके खि़लाफ़ झूठा प्रचार कर रही हैं।
आज यहाँ बाढ़ प्रभावित इलाकों के निवासियों को मुआवज़ा वितरित करने के मौके पर इक्ट्ठ को संबोधन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवायती राजनैतिक पार्टियों के पंजाब और लोक विरोधी स्टैंड के कारण राज्य के लोग अब इन पार्टियों पर भरोसा नहीं करते। उन्होंने कहा कि राज्य के बुद्धिमान और बहादुर लोगों ने साल 2022 के विधान सभा मतदान के दौरान इन पार्टियों को करारी हार दी जिस कारण यह पार्टियाँ अब बौखलाहट में हैं। भगवंत मान ने कहा कि इन पार्टियों के नेता लोगों को गुमराह करने के लिए अब आपस में सांठगांठ कर रहें हैं।
मुख्यमंत्री ने इन नेताओं पर तंज़ कसते हुये कहा, ‘‘पहले यह नेता जहाँ भी जाते थे तो इनको हार डाल कर स्वागत होता था परन्तु अब मतदान में हरा कर इन ‘स्वागत’ किया जाता है।“ उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों ने इस बार साधारण घरों के बेटे-बेटियों को अपने नुमायंदे चुना जो लगन और समर्पित भावना से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं जबकि इसके उलट यह रिवायती पार्टियाँ सत्ता में होते हुये अपनी ज़िम्मेदारी सही ढंग से निभाने में बुरी तरह नाकाम रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवायती पार्टियों के नेताओं ने अपने संकुचित राजनैतिक हितों के लिए राज्य के संसाधनों को अंधाधुन्ध लूटा। भगवंत मान ने कहा कि जिस समय पर राज्य बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, नौजवानों के धढ़ा-धड़ विदेश जाने समेत अन्य समस्याओं के साथ जूझ रहा था तो यह नेता ग़ैर- कानूनी ढंग से अपनी तिजौरियां भरने में जुटे हुए थे। उन्होंने कहा कि इन्होंने राज्य और लोगों की परवाह किये बिना अपने महल और कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नेताओं ने राज्य की तरक्की और ख़ुशहाली को रास्ते से उतार कर पंजाब के रास्ते में काँटे बीजे। उन्होंने कहा कि राजनैतिक नेताओं ने ख़ुदगर्ज़ी के लिए राज्य को संकट की भट्टी में झोंक दिया। भगवंत मान ने कहा कि इन नेताओं के हाथ राज्य के विरुद्ध किये गुनाहों के साथ रंगे हुए हैं और पंजाब की पीठ में छुरा मारने वाले इन नेताओं को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल पर निशाना साधते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री बादल लम्बा समय राज्य के वित्त मंत्री रहे परन्तु वह दावा हमेशा राज्य का ख़ज़ाना खाली होने का करते रहे। उन्होंने कहा कि राज्य की भलाई के लिए वित्त मंत्री के तौर पर अपनी ज़िम्मेदारी निभाने से नाकाम रहने के बाद अब वह भाजपा के बेड़े में सवार हो गए हैं। भगवंत मान ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री के पास उर्दू की शेयरो-शायरी से बिना राज्य की भलाई और यहाँ तक कि भाजपा के लिए भी तिनका भर भी नहीं होना।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिस किसी ने भी जनता का एक रुपया भी लूटा है, उसे लोगों के सामने जवाबदेह बनाया जायेगा। भगवंत मान ने कहा कि वह ऐसीं सभी लूटों का पर्दाफाश करेंगे और कानून के मुताबिक सख़्त कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की यह दृढ़ वचनबद्धता है कि भ्रष्टाचारी नेता चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खि़लाफ़ केस दर्ज होगा और उसे अपने गुनाहों की सज़ा मिलेगी।
रिवायती राजनैतिक पार्टियों पर तीखे हमले करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि वह तुच्छ मसले उठा कर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह नेता तब क्यों ख़ामोश हो गए थे, जब राज्य के लोगों ने उनको सत्ता संभालने का मौका दिया था। भगवंत मान ने कहा कि यह नेता राज्य से सम्बन्धित अलग-अलग मसलों के बारे लोगों को गुमराह करने के लिए कोलाहल डाल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और अकालियों की आलोचना करते हुये कहा कि इन नेताओं ने अपने राजनैतिक हितों के लिए राज्य में गैंगस्टरों को संरक्षण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गैंगस्टर हमारी सरकार के सत्ता संभालने के बाद ही पैदा नहीं हुए, बल्कि कांग्रेस और अकाली नेताओं ने अपनी सरकारों के दौरान इन गैंगस्टरों को संरक्षण दिया क्योंकि इन नेताओं और पार्टियों ने ऐसे नौजवानों को बंदूकों देकर अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल किया।
मुख्यमंत्री ने अफ़सोस प्रकटाया कि यह कितनी बदकिस्मती है कि ज़िला फाजिल्का में 2020 में आयी बाढ़ों के कारण बड़े स्तर पर नुक्सान हुआ परन्तु समय की सरकार ने खोखली बयानबाज़ी के इलावा लोगों को राहत देने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि ज़िले में बाढ़ों के कारण व्यापक तबाही हुई परन्तु बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़ा देने की बजाय राज्य सरकार ने यह मामला लटका कर मुसीबत के मारे लोगों की मुश्किलें बढ़ाईं। उन्होंने कहा कि तब की सरकार की मनमानी इन बातों से भी झलकती है कि लोगों को मुआवज़ा देने के लिए एक रुपया भी नहीं खर्चा गया।
फाजिल्का ज़िले में बाढ़ पीड़ितों को 32 करोड़ रुपए का मुआवज़ा बांटा गया है जिसमें से बल्लूआना विधान सभा हलके के बाढ़ प्रभावित लोगों को 25 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है।
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