पंचकूला, 4 मई : एक जटिल स्टेंटिंग प्रोसीजर में 66 वर्षीय व्यक्ति की हृदय की प्रमुख धमनी में ब्लॉकेज को रोटेब्लेशन एंजियोप्लास्टी के साथ हाल ही में ओजस अस्पताल, सेक्टर 26 पंचकूला में सफलतापूर्वक हटाया गया ।
ओजस में कार्डियक साइंसेज विभाग के चेयरमैन डॉ अनुराग शर्मा, जिन्होंने इस रोटेब्लेशन प्रोसीजर को अंजाम दिया, ने कहा कि मरीज की धमनी में काफी मात्रा में ठोस कैल्शियम की ब्लॉकेज थी। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थितियों में हम या तो रोटेब्लेशन एंजियोप्लास्टी के लिए जाते हैं या बाईपास सर्जरी।
उन्होंने कहा, आम तौर पर आर्टरी में कम कैल्शियम पाया जाता है लेकिन इस मामले में अधिक कैल्शियम होने के कारण जटिल एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया की रोटेब्लेशन के साथ आवश्यकता थी। ऐसे मामलों में एंजियोप्लास्टी के दौरान बैलून कभी-कभी वायर के साथ नहीं जाता है। एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया के दौरान कैल्शियम को तोडऩे की जरूरत होती है।
रोगी पर रोटेब्लेशन एंजियोप्लास्टी प्रोसीजर के बारे में बात करते हुए, डॉ अनुराग ने कहा कि इस तकनीक में सामान्य वायर डालने से पहले हमने एक माइक्रो कैथेटर रखा और धमनी के अंदर सामान्य कोरोनरी वायर के साथ रोटा वायर का एक्सचेंज किया और 1,80,000 आरपीएम की गति के साथ 1.5 मिमी रोटेब्लेशन बूर से धमनी में कैल्शियम को तोड़ा। धमनी को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने के लिए हम धीरे-धीरे आगे बढ़े । प्रक्रिया के दौरान, पेकिंग मोशन के साथ हम आगे बढ़े और अंतत: लीजन को सफलतापूर्वक पार कर लिया, उन्होंने कहा।
फिर हमने प्रवाह की जाँच की और एक पॉलिशिंग रन लिया। बैलूनिंग के बाद, हमने 2 स्टेंट लगाए और फिर से हमने स्टेंट में बैलूनिंग की जो कि स्टेंट की पॉलिशिंग और विस्तार की जांच करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण कदम था।
रोगी का अंतिम परिणाम बहुत अच्छा था, डॉ अनुराग ने कहा।
डॉ अनुराग ने बताया कि रोटेब्लेशन तकनीक कॉर्नरी आर्टरी डिजीज के इलाज की अत्याधुनिक तकनीक है। हृदय की धमनियों में जमे कैल्शियम को निकालने के लिए फ्लोरोस्कोप की सहायता से हृदय वाहिकाओं के अंदर कैथेटर की तरह एक छोटी घूमती हुई ड्रिल को डाला जाता है। कैथेटर तब कैल्शियम को काटता है। इस प्रकार कोरोनरी स्टेंट को आसानी से अंदर डाला जाता है और पर्याप्त रूप से इसे बढ़ाया जाता है। यह प्रयोग उन मरीजों में किया जाता है, जिनकी धमनी में जमा प्लाक अत्यंत कठोर हो जाता है।
रोटेब्लेशन कोरोनरी इंटरवेंशन में एक जटिल और सबसे चुनौतीपूर्ण तकनीक है जिसका उपयोग कोरोनरी धमनियों (कठोर धमनियों) में भारी कैल्सीफिकेशन वाले रोगियों में रक्त प्रवाह में सुधार करने की स्थिति में स्टेंट देने के लिए किया जाता है। यह ड्रिलिंग तकनीक गुब्बारे और स्टेंट को आसानी से पार करने में मदद करने के लिए धमनियों के अंदर की सफाई करती है। इस तकनीक का उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों में बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा सावधानी से किया जाता है।
उन्होंने बताया कि मधुमेह रोगियों और चेन धूम्रपान करने वालों में और कभी-कभी शरीर में विकार के कारण कैल्शियम का संचय प्रमुख रूप से देखा जाता है।
इस बीच ओजस अस्पताल, पंचकुला में एक वोल्केनो आइवस निर्मित फिलिप्स स्नष्ठ10 कैथ लैब है ।
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