भवानीपुर विधानसभा सीट टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए हमेशा से ही सुरक्षित सीट रही है और वो पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से भाग्य आजमाने से पहले यहीं का प्रतिनिधित्व करती रही हैं। लेकिन, बीजेपी फिर भी बंगाल की सीएम के लिए इस उपचुनाव के जरिए विधानसभा में दाखिल होने का रास्ता आसान नहीं होने देना चाहती। इसलिए माना जा रहा है कि महिला और प्रखर वक्ता होने के नाते प्रियंका टिबरेवाल पर ही वह दांव खेलने की तैयारी की है। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर बंगाल की एंटल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। वहां उन्हें 27.7 फीसदी वोट मिले थे। इस सीट पर टीएमसी के स्वर्ण कमल साहा ने 58,257 वोट से उन्हें हराया दिया था।
कब किसके हाथ में रहा इस सीट की कमान
1972- अध्यापक अमलेश जाना- कांग्रेस
1977- हरिपद जन- जेएनसीप
1982- प्रशांत कुमार प्रधान-सीपीएम
1987-91- प्रशांत प्रधान- सीपीएम
1996- खानरा अजीत- कांग्रेस
2001-16- अर्धेंदु मैती- टीएमसी

कोलकाता/नयी दिल्ली, 9 सितंबर:
माना जा रहा है कि कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी प्रियंका टिबरेवाल को उतार सकती है। पश्चिम बंगाल भाजपा में पेशे से वकील टिबरेवाल कोई नया चेहरा नहीं हैं और वह न्यूज चैनलों पर भी जोरदार तरीके से अपनी पार्टी की वकालत करती रही हैं। हालांकि, चुनावी राजनीति का उनका अभी तक का रिकॉर्ड कोई प्रभावी नहीं रहा है, लेकिन उन्हें लगता है कि अगर पार्टी ने उनपर भरोसा किया और वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद मिला तो ‘न्याय और अन्याय’ की इस जंग में भवानीपुर के मतदाताओं का उन्हें समर्थन मिल सकता है।
बता दें कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता बनर्जी उपचुनाव के लिए शुक्रवार के दिन नामांकन भरेंगी. बता दें कि इस सीट को शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने ममता बनर्जी के लिए खाली किया था। बता दें कि ममता बनर्जी को नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी को हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में मुख्यमंत्री बने रहने के लिए ममता बनर्जी का चुनाव जीतना ही होगा।
प्रियंका भी हार चुकी हैं पिछला चुनाव भवानीपुर विधानसभा सीट टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए हमेशा से ही सुरक्षित सीट रही है और वो पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से भाग्य आजमाने से पहले यहीं का प्रतिनिधित्व करती रही हैं। लेकिन, बीजेपी फिर भी बंगाल की सीएम के लिए इस उपचुनाव के जरिए विधानसभा में दाखिल होने का रास्ता आसान नहीं होने देना चाहती। इसलिए माना जा रहा है कि महिला और प्रखर वक्ता होने के नाते प्रियंका टिबरेवाल पर ही वह दांव खेलने की तैयारी की है। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर बंगाल की एंटल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। वहां उन्हें 27.7 फीसदी वोट मिले थे। इस सीट पर टीएमसी के स्वर्ण कमल साहा ने 58,257 वोट से उन्हें हराया दिया था।

कौन हैं प्रियंका टिबरेवाल ?
प्रियंका टिबरेवाल पिछले साल अगस्त से पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं। 41 वर्षीय प्रियंका सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाई कोर्ट में वकालत भी करती हैं। पहले वह भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो की लीगल एडवाइजर रह चुकी हैं। 2014 में वह गायक से राजनेता बने बाबुल सुप्रियो की सलाह पर ही भाजपा में शामिल हुई थीं। कहा जाता है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर कमल खिलाने का फैसला किया था। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले 2015 में वह कोलकाता म्युनिसिपल काउंसिल का भी चुनाव भाजपा के टिकट पर ही वार्ड नंबर 58 से ( एंटल्ली) लड़ चुकी हैं, लेकिन वहां भी उन्हें टीएमसी के स्वपन सम्मादार ने हरा दिया था। 7 जुलाई, 1981 को कोलकाता में जन्मीं टिबरेवाल ने स्कूली शिक्षा वेलैंड गोल्डस्मिथ स्कूल से ली है, लेकिन ग्रैजुएशन दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया है। लेकिन, लॉ के लिए वह वापस कोलकाता आ गईं और 2007 में उन्होंने हजारा लॉ कॉलेज से यह कोर्स पूरा किया। वह थाईलैंड एसंप्शन यूनिवर्सिटी से एमबीए भी कर चुकी हैं।
‘न्याय और अन्याय का युद्ध‘
भवानीपुर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने एक निजी चैनल से कहा है,’पार्टी ने मुझसे संपर्क किया है और मेरी राय ली है कि क्या मैं भवानीपुर से चुनाव लड़ना चाहूंगी या नहीं। कई नाम हैं और मुझे नहीं पता कि कौन उम्मीदवार होगा। मैं अपने सभी वरिष्ठ पार्टी नेताओं को धन्यवाद देना चाहूंगी, जिन्होंने इतने वर्षों में मेरा इतना साथ दिया है।’ उन्होंने साफ कहा है कि ‘अगर मेरी पार्टी ममता बनर्जी के खिलाफ मुझे भवानीपुर से उतारती है, तो मैं अपना बेस्ट दूंगी और मुझे विश्वास है कि लोग न्याय और अन्याय के इस युद्ध में मेरा समर्थन करेंगे…..मुझे पूरा भरोसा है कि लोग सत्ताधारी टीएमसी के कुशासन के खिलाफ मतदान करेंगे। यह चुनाव बाद हिंसा और बंगाल के लोगों की तकलीफों के खिलाफ हमारी लड़ाई है।’

30 सितंबर को होगी वोटिंग भवानीपुर सीट पर 30 सितंबर को उपचुनाव होना है और 3 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बने रहने के लिए यहां से उनका जीतना जरूरी है। क्योंकि, नंदीग्राम सीट पर उन्हें भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में हरा दिया था और वह इस समय विधानसभा की सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री को शपथ लेने के 6 महीने के अंदर विधानसभा (या विधान परिषद का जो कि बंगाल में नहीं है) का सदस्य चुना जाना जरूरी है। कांग्रेस ने इस सीट पर ममता के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है और सीपीएम ने श्रीजीब बिस्वास को उतारने का निर्णय किया है। (तस्वीरें सौजन्य- प्रियंका टिबरेवाल के फेसबुक और ट्विटर से)

