Wednesday, May 6

पुरानी कचहरी स्थित रिकॉर्ड रूम में रखे राजस्व व अन्य रिकॉर्ड को डिजीटल करके लघु सचिवालय स्थित मॉड्रन रिकॉर्ड में किया जाएगा शिफ्ट, जिला राजस्व अधिकारी को डिजीटाईलेशन प्रक्रिया को स्पीड-अप करने के दिए निर्देश। 

 मनोज त्यागी, करनाल 6 जुलाई:

    उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने सोमवार को पुरानी कचहरी स्थित पुराने रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया और उसमें राजस्व रिकॉर्ड से भरे बस्तों को देखा। इस मौके पर इन्द्री के उपमण्डलाधीश सुमित सिहाग व जिला राजस्व अधिकारी श्याम लाल भी मौजूद थे। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि पुराने रिकॉर्ड को स्कैन करने की जो प्रक्रिया चल रही है, उसमें तेजी लाई जाए, ताकि पुराने रिकॉर्ड को जल्द से जल्द यहां से सैक्टर-12 स्थित लघु सचिवालय के द्वितीय खंड में बने मॉड्रन रिकॉर्ड रूम में शिफ्ट किया जा सके।   

        पुरानी कचहरी स्थल में बना रिकॉर्ड रूम अंग्रेजो के जमाने का है। यहां 1865 से लेकर 1964 तक का राजस्व रिकॉर्ड मौजूद है। 1905 से 31 मार्च 1987 तक का ज्यूडिशियल रिकॉर्ड भी यहां मौजूद बताया गया है। एक अप्रैल 1987 से ज्यूडिशियल रिकॉर्ड, न्यायिक परिसर भवन में शिफ्ट हो गया। करनाल को अंग्रेजो के जमाने से ही जिले का दर्जा प्राप्त था। आजादी के बाद पानीपत, कुरूक्षेत्र व कैथल जिले भी करनाल के ही भाग थे। इन जिलो के राजस्व रिकॉर्ड की बात करें तो, 1959 तक का पानीपत का रिकॉर्ड, 1956 तक का कुरूक्षेत्र और 1957 तक का कैथल जिले का राजस्व अब भी यहां मौजूद है। पुराने रिकॉर्ड की प्रति लेने के लिए लोग यहां आते हैं। उपायुक्त की मंशा है कि रिकॉर्ड रूम की बिल्डिंग अति पुरानी हो जाने के कारण इसमें रखे रिकॉर्ड को डिजीटल करके जल्द से जल्द सैक्टर-12 स्थित मॉड्रन रिकॉर्ड में रख दिया जाए।      

डिजीटल इंडिया कार्यक्रम के तहत आधुनिक रिकॉर्ड रूम की हुई थी स्थापना-उपायुक्त ने बताया कि बीते वर्ष में मॉड्रन रिकॉर्ड रूम में रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था की गई थी। नई व्यवस्था में रिकॉर्ड को स्कैन करके डिजीटल रूप में तैयार किया गया और मूल प्रतियों के रख-रखाव के लिए कपड़े के बंडल या बस्ते की बजाए, स्टील से निर्मित पेटियो में रखा गया है, ताकि वह सुरक्षित बना रहे। पेटियों पर बार कोड भी लगाया गया है, जिससे तुरंत यह पता लगाया जा सकता है कि किस भूमि मालिक के रिकॉर्ड के दस्तावेज किस पेटी में सुरक्षित हैं। रिकॉर्ड रूम में केवल वही कर्मचारी प्रवेश कर सकते हैं, जिनको अधिकृत किया गया है। नई व्यवस्था में रिकॉर्ड के रख-रखाव से गलने और फट जाने की सम्भावना भी नहीं है। भूमि रिकॉर्ड की नकल प्राप्त करने के कार्य में पारदर्शिता आई है। 

                पुराने रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण करने के बाद उपायुक्त ने सैक्टर-12 स्थित नए रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया और डीआरओ को निर्देश दिए कि पुराने व बचे हुए रिकॉर्ड की स्कैनिंग का काम मुकम्मल करके उस रिकॉर्ड को भी मॉड्रन रिकॉर्ड रूम में ही सुरक्षित रखा जाए। उपायुक्त के अनुसार अब तक 40 लाख से अधिक पेज स्कैन किए जा चुके हैं, जो बचे हैं उपायुक्त ने उसके स्पीड-अप करने के निर्देश दिए। उन्होंने मॉड्रन रिकॉर्ड रूम के विस्तार किए जाने की सम्भावना पर भी डीआरओ से चर्चा की, ताकि समूचा रिकॉर्ड एक ही जगह पर मौजूद रहे। इन कार्यों के लिए उपायुक्त ने इन्द्री के एसडीएम सुमित सिहाग को सुपरविजन की जिम्मेदारी दी।