Saturday, May 23

कंबोडिया व ओमान से ऑपरेट होते हैं साइबर क्राइम नेटवर्क्स : रोजाना कई करोड़ों रूपए विदेशी खातों में हो जातें हैं ट्रांसफर 

 आम जनता को साइबर क्राइम से बचाव व पुलिस विभाग को इससे निपटने के लिए जागरूक करने में जुटे हैं सागर पंघाल 

चण्डीगढ़ : देश में साइबर क्राइम एक महामारी का रूप ले चुका है, जिसका जाल ग्रामीण स्तर तक फैल चुका है। ये कहना है साइबर एक्सपर्ट सागर पंघाल का, जो सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भी हैं। वे आज चण्डीगढ़ में एक प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए। 

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि देश में बढ़ रही बेरोजगारी के कारण लोग साइबर क्राइम करके पैसा कमा रहे और अन्य लोगों की देखा-देखी इस ओर आकर्षित हो रहें हैं। बाद में उनके परिवार के सदस्यों को भी इस ईज़ी मनी का चस्का लग जाता है। इस काम में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं और यहां तक कि नाबालिग बच्चे भी इससे जुड़े हुए हैं। एडवोकेट सागर पंघाल ने बताया कि उन्होंने साइबर क्राइम का गहन अध्ययन किया है और अनेक केस लड़े हैं, जिससे उन्हें साइबर क्राइम नेटवर्क्स व इसकी प्रणाली की पूरी जानकारी है। उन्होंने बताया कि कंबोडिया व ओमान देश साइबर क्राइम नेटवर्क्स के हब हैं। भारत में अमीर तो अमीर, वे लोग तो गरीबों को भी नहीं छोड़ते। उनके मुताबिक गांव के लोग भी बड़ी ही आसानी से यहीं बैठे-बैठे उक्त देशों में सिम रजिस्टर्ड करवा लेते हैं और फिर ठगी मार कर वसूले गए पैसे को यूएसडीटी करेंसी में कन्वर्ट करके विदेशी खातों में जमा करवा देते हैं। उन्होंने बताया कि यूएसडीटी एक स्थिर मुद्रा है जिसे टेदर लिमिटेड नामक कंपनी द्वारा जारी किया गया है। यह अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) से आंकी गई है, जिसका अर्थ है कि 1 यूएसडीटी की कीमत लगभग 1 यूएसडी के बराबर होती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग में किया जाता है ताकि निवेशक बाजार की अस्थिरता से बच सकें।

सागर पंघाल ने आगे बताया कि लोन दिलाने वाले कई एजेंट भी इस नेटवर्क का हिस्सा बने हुए हैं। वे लोन दिलाने के लिए खुलवाए जाने की प्रक्रिया के दौरान संबंधित ग्राहक से कुछ समय के लिए उसकी अकाउंट किट मांग लेते हैं और फिर कुछ समय के लिए उसमें साइबर ठगी से वसूला हुआ पैसा कुछ समय के लिए पार्क करके विदेशी खातों में भेज दिया जाता है। लोन लेने वाले को इसका पता उस समय चलता है, जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंचती है। इस प्रकार निर्दोष लोग भी जेल पहुंच रहे हैं। जिला अदालतों में उन्हें जल्दी जमानत नहीं मिलती, जिससे उन्हें उच्च न्यायालयों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दरवाजा खटखटाना पड़ता है। इस वजह से पहले से ही लंबित मुकद्दमों का बोझ झेल रही उच्च अदालतों में और भी अधिक काम का दबाव पड़ रहा है।

सागर पंघाल ने बताया कि वे आम जन को साइबर क्राइम से बचाव के लिए जागरूक करने में भी जुटे हुए हैं तथा उन्हें बताते हैं कि कोई भी अंजान लिंक अथवा पीडीएफ फाइल बिल्कुल न खोलें और न ही किसी अनजान व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ें। इसके अलावा वे हरियाणा पुलिस के कर्मियों को भी साइबर क्राइम से निपटने के लिए भी वर्कशॉप्स लगा कर उपयोगी जानकारी सांझा करते हैं व ट्रेनिंग सत्र भी आयोजित करते हैं। 

उन्होंने कहा कि वे अपनी योग्यता का इस्तेमाल करके आज तक साइबर क्राइम से पीड़ित सैंकड़ों लोगों के करोड़ों रुपए वापिस दिला चुके हैं।