- जगतगुरू शंकराचार्य की मौजूदगी में वीरेश शांडिल्य ने कहा कि खून के अंतिम कतरे तक देशद्रोही ताकतों के खिलाफ लड़ाई जारी रखूंगा
- वीरेश शांडिल्य ब्रम्हलीन पूज्नीय मां दिव्या भारती जी को श्रद्धांजलि देने मुलाना गौरी ताल मंदिर पहुंचे, शंकराचार्य की मौजूदगी में कहा कि सनातन की रक्षा के लिए किसी भी कुर्बानी को तैयार
डेमोक्रेटिक फ्रंट, अंबाला – 26 मार्च :
एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया व विश्व हिन्दु तख्त प्रमुख वीरेश शांडिल्य ने तीर्थ ज्योतिमठ अवांतर भानूपुरा पीठ के जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद की मौजूदगी में कहा कि जब तक उनके शरीर में खून का अंतिम कतरा दौड़ रहा है वह आतंकवादियों, खालिस्तानियों व देशद्रोही ताकतों के खिलाफ जन आंदोलन तैयार करते रहेंगे और सनातन धर्म की मजबूती के लिए भी हर कुर्बानी करने को तैयार रहेंगे। वीरेश शांडिल्य आज श्री श्री 1008 परम पूज्य श्री मां दिव्या भारती जी महाराज के ब्रम्हलीन होने पर उन्हें एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया व विश्व हिन्दु तख्त की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित करने श्री कृष्ण दिव्या आश्रम शिव धाम गौरीताल मंदिर मुलाना पहुंचे और मां दिव्या भारती को श्रद्धांजलि अर्पित की और भानूपुरा पीठ के जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद सहित अनेकों संतों का आशीर्वाद लिया। इस मौके पर हजारों कृष्ण दिव्या आश्रम से जुड़े भक्तजन मौजूद थे। वीरेश शांडिल्य को पुष्प माला पहनाकर जगतगुरू शंकराचार्य ने आशीर्वाद दिया।
एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया व विश्व हिन्दु तख्त प्रमुख वीरेश शांडिल्य ने परम पूज्य मां दिव्या भारती जिनका जन्म 1951 इंदौर में हुआ और पिछले कई वर्षों से मुलाना के आश्रम में जन कल्याण के कार्य, मंदिरों के जीर्णोद्वार का कार्य और ईश्वर के प्रति आस्था जगाने का कार्य जगतगुरू शंकराचार्य ज्ञानानंद के सानिध्य में कर रही थी। वीरेश शांडिल्य ने कहा कि आज मैं जगतगुरू शंकराचार्य व अनेको संतों के बीच मंच पर बैठ कर माता दिव्या भारती को श्रद्धांजलि दे रहा हूं जिसके मैं योग्य नहीं हूं लेकिन संतों के साथ बैठकर निश्चित तौर पर ऐसा अनुभव कर रहा हूं कि जाने अनजाने में हुई भूलचूक पाप माफ होंगे और जगतगुरू शंकराचार्यों की मौजूदगी में वह ऐसा अनुभव कर रहे हैं कि जैसे उन्होंने आज कुंभ स्नान कर लिया हो। वीरेश शांडिल्य ने कहा कि मां दिव्या भारती जैसी आत्माएं कभी मरती नहीं वह अमर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जिनके ब्रम्हलीन होने पर आज शंकराचार्य व अनेकों धर्मगुरू संत उन्हें श्रद्धांजलि देने आए तो निश्चित तौर पर बैकुंठ के द्वार उनके लिए खुल गए। वीरेश शांडिल्य ने कहा कि शंकराचार्य की मौजूदगी में बोलना सूरज को रोशनी दिखाना है लेकिन उनका संकल्प है आज जगतगुरू शंकराचार्य के सामने हैं कि अंतिम सांस तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ते रहेंगे और सनातन की मजबूती के लिए तन मन धन से समर्पित रहेंगे।
उन्होंने शंकराचार्य व संतों से विनम्र अनुरोध किया कि गुरू के बिना ज्ञान नहीं, गुरू के बिना भगवान नहीं और गुरू हर वक्त भगवान से संवाद करता है आज वह गौरीताल मंदिर में संतों के बीच आकर गर्व महसूस कर रहे हैं और उन्होंने शंकराचार्य सहित तमाम संतों से कहा कि दुआ करना कि उनका जीवन राष्ट्र के काम आए, सनातन के काम आए साथ ही उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं को कहा कि अपने बच्चों को तिलक लगाएं, जनेऊ डालें, शिखा रखवाएं, उन्हें प्रतिदिन मंदिर भेजें जो भी उनका इष्ट देवता हैं उसकी पूजा करवाने की आदत डाले और मंदिर में जाकर प्रतिदिन घंटी बजाएं। सौ करोड़ सनातनी अगर रोज मंदिर में जाकर घंटी बजाएंगे और पूजा करेंगे तो सनातन संगठित व मजबूत होगा। इस मौके पर वीरेश शांडिल्य ने विश्व हिन्दु तख्त की तरफ से गौरीताल मंदिर को 11 हजार की राशि दी और वीरेश शांडिल्य को इस मौके पर दोशाला व श्रीमद्भागवत गीता दी गई। इस मौके पर गुरू का अटूट लंगर चला और लक्की नागपाल, नलेंद्र गौतम, सुभाष शर्मा पावटी, प्रमोद शर्मा रूसतम पुर, मामा जी, सुरेंद्र पाल केके, गोल्डी पाहवा भी मौजूद रहे।