Tuesday, May 12

शीर्ष अदालत ने सिद्धू को 65 साल के बुजुर्ग को ‘जान बूझकर नुकसान पहुंचाने’ के अपराध का दोषी ठहराया था लेकिन उन्हें जेल की सजा से बख्श दिया था एवं उन पर 1000 रूपये का जुर्माना लगाया था। शीर्ष अदालत ने 15 मई, 2018 को इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस फैसले को दरकिनार कर दिया था जिसमें उन्हें गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देकर तीन साल कैद की सजा सुनायी गयी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने सिद्धू को एक वरिष्ठ नागरिक को चोट पहुंचाने का दोषी माना था।

संवाददाता चंडीगढ़, डेमोरेटिक फ्रंट :

पंजाब चुनाव से ठीक पहले एक नया ट्विस्ट आ गया है. पंजाब में कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के लिए नई मुसीबत आन पड़ी है। कुछ साल पहले उनके खिलाफ बंद हुआ रोड रेज केस फिर से खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट रोड रोज मामले में फिर से सुनवाई शुरू करने जा रहा है। जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस संजय किशन कौल की स्पेशल बेंच गुरुवार शाम 3.30 बजे सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट पीड़ित परिवार की याचिका पर सुनवाई करेगा। इससे पहले 15 मई, 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को 1988 के रोड रेज मामले में मात्र 1,000 रुपये के जुर्माने के साथ छोड़ दिया था। इसमें पटियाला निवासी गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। पंजाब और हरियाणा एचसी ने सिद्धू को स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के लिए दोषी ठहराया था और उन्हें 3 साल की जेल की सजा सुनाई थी, लेकिन SC ने उन्हें 30 साल से अधिक पुरानी घटना बताते हुए 1000 जुर्माने पर छोड़ दिया था।

पीठ ने नवजोत सिंह सिद्धू को 2018 में पीड़ित परिवार की एक याचिका पर नोटिस जारी किया और स्पष्ट किया कि वह केवल सजा के सीमित मुद्दे पर ही विचार करेगी।

बता दें कि 2018 में शीर्ष अदालत में जस्टिस जे चेलामेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच ने सिद्धू पर 1988 के रोड रेज मामले में मात्र 1,000 जुर्माना लगाया था बेंच को तय करना था कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू व उनके दोस्त रूपिंदर सिंह संधू को तीन साल की सजा के फैसले को बरकरार रखा जाए या नहीं। 18 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

इसने कांग्रेस विधायक को गंभीर आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत चोट पहुंचाने के मामूली अपराध का दोषी ठहराया।

हालाकि समीक्षा याचिका के परिणाम से सिद्धू के राजनीतिक करियर पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत यह केवल दो साल या उससे अधिक की जेल की अवधि है जो एक मौजूदा सांसद या एक विधायक को अयोग्य घोषित कर सकती है। इसलिए यदि सिद्धू को वर्तमान आरोप के तहत अधिकतम जेल की सजा मिलती है, तो वह पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में विधायक के रूप में फिर से चुने जाने पर अपने पद पर बने रहने के लिए अयोग्य नहीं होंगे।

सिद्धू अमृतसर पूर्व सीट से मौजूदा विधायक हैं और उन्होंने इसी सीट से नामांकन पत्र दाखिल किया है। इस सीट से शिरोमणि अकाली दल ने उनके खिलाफ पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को मैदान में उतारा है।