-घग्घर नदी में न जाए गंदा पानी, प्रदूषण फैलाने वालों पर की जाए कार्रवाई
-आमजन को जल एवं पर्यावरण सरंक्षण को लेकर किया जाए जागरूक
-घग्घर नदी को प्रदूषण मुक्त को लेकर एक्शन प्लान के तहत कार्यों की समीक्षा, अधिकारियों को दिए समयावधि में एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) प्रस्तुत करने के निर्देश
सतीश बंसल सिरसा, 06 अगस्त:
उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि घग्घर नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए बनाए गए एक्शन प्लान के तहत किए जा रहे कार्यों को अधिकारी गंभीरता से लेते हुए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। कार्यों की रिपोर्ट समयावधि में संबंधित विभाग को भेजें। इसमें किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और व्यक्तिगत रूचि लेकर एक्शन प्लान पर कार्य करें।
उपायुक्त ने शुक्रवार को घग्घर नदी को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर एक्शन प्लान पर किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और एक्शन प्लान के तहत संबंधित विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की रिपोर्ट के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर डीडीए डा. बाबू लाल, कार्यकारी अभियंता रणजीत सिंह मलिक, कार्यकारी अभियंता राम किशन शर्मा, कार्यकारी अभियंता अजय पंघाल, उप सिविल सर्जन डा. बुधराम, वैज्ञानिक सुनील श्योराण सहित संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण व शहरी इलाकों से निकलने वाला गंदा पानी घग्घर में न जाए। इसके लिए संबंधित विभाग कार्य योजना बनाकर कार्य करें ताकि घग्घर को प्रदूषण मुक्त किया जा सके। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) निर्देशानुसार घग्घर को प्रदूषण मुक्त किया जाना है। सभी विभाग एनजीटी के निर्देशानुसार एक्शन प्लान के तहत घग्घर में आने वाले गंदे पानी की समुचित रोकथाम सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक पर प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए। पॉलिथीन का प्रयोग न हो इसके लिए आमजन को जागरूक किया जाए और यदि कोई उल्लंघन करता है तो उसका चालान किया जाए।
उन्होंने कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट के निष्पादन पर प्रभावी कदम उठाए जाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कैंप लगाएं और लोगों के स्वास्थ्य की जांच करें। इसके साथ-साथ लोगों को घग्घर को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जागरूक भी करें। वन विभाग पौधारोपण अभियान के तहत अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित की जाए और नदी के साथ लगते गांवों में पीने के पानी के टेंकों के सैंपल समय-समय पर लिए जाएं और उस पानी में हैवी मेटल सहित अन्य प्रदूषित अव्ययों की मात्रा की जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि भूमिगत जल स्तर को स्वच्छ रखने के लिए कोई भी संस्थान या उद्योग अपने गंदे पानी को जमीन में न डालें।
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