-संबंधित विभागों को योजना के तहत 100-100 आवेदन आमंत्रित करने का दिया लक्ष्य
-प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना की जिला स्तरीय बैठक का आयोजन, उपायुक्त ने की योजना की कार्य प्रगति की समीक्षा
सतीश बंसल सिरसा, 6 जुलाई।
उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण सूक्ष्म इकाईयों को बढावा देने के उद्ेश्य से आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत शुरू की गई प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। संबंधित विभाग योजना के तहत मिले निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्ति के लिए गंभीरता से कार्य करें। इसके साथ ही बैंक योजना के पात्र व्यक्तियों को प्राथमिकता के साथ ऋण उपलब्ध करवाते हुए योजना के बारे में लोगों को जागरूक करें।
उपायुक्त मंगलवार को लघुसचिवालय स्थित सभागार में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना की जिला स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। कोविड-19 के पहले बैठक का आयोजन नहीं हो पाया था। अब हालात सामान्य होने पर उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक की योजना की समीक्षा की गई। बैठक में उप निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण डा. बाबू लाल, एलडीएम सुनील कुकड़ेजा, सहायक निदेशक जिला एमएसएमई गुरप्रताप सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
उपायुक्त ने कहा कि सरकार द्वारा योजना के तहत 2 लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को फॉर्मल सेक्टर में लाने के लिए दस हजार करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अधिकतम 10 लाख रुपये तक का अनुदान सहायता के रूप में परियोजना के लिए प्रदान किया जाता है, जिसमें 35 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। उपायुक्त ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण में नये सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने एवं बढावा देने के लिए जिला में वन-डिस्ट्रीक्ट-वन-उत्पाद के तहत किन्नु उत्पाद का चयन किया गया है। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र में आम, आलू, लीची, टमाटर, साबूदाना, किन्नू, भुजिया, पेठा, पापड़, आचार, मोटे अनाज आधारित उत्पाद, पोल्ट्री, पशुचारा आदि के प्रसंस्करण में काम कर रहे विद्यमान सूक्ष्म उद्यम भी लाभ लेने के पात्र हैं।
उपायुक्त यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना से संबंधित विभाग योजना के तहत आवेदनों पर प्राथमिकता से कार्यवाही करें, ताकि जिला में प्राप्त लक्ष्यों को निर्धारित अवधि में पूरा किया जा सके। उन्होंने एलडीएम को कहा कि वे योजना के तहत मिलने वाले ऋण को समयबद्ध अवधि में उपलब्ध करवाएं और लोगों इस स्कीम के बारे में भी जानकारी दें। उन्होंने योजना से संबंधित कृषि, बागवानी, उद्यम, डेयरी, मत्स्य आदि विभागों को पीएमएफएमई योजना के लिए कम से कम 100-100 आवेदन आमंत्रित करने का लक्ष्य दिया और इसका निर्धारित अवधि में पूरा करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
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