कोरोना कि जंग में जिस तरह निजामूद्दीन कि भूमिका संदेहस्पद नहीं अपितु दुर्भाग्यपूर्ण है। राष्ट्र के स्वास्थ्य को लेकर हो रहे प्रयासों पर कुठाराघात है। इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है दिल्ली सरकार का निज़ामुद्दीन मरकज़ पर अपनी सफाई देना और यह बताना कि सब कुछ ठीक है। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। जिस प्रकार से निज़ामुद्दीन इलाके में लोगों की धरपकड़ हो रही है उससे तो किसी भयानक साजिश की बू आ रही है। इसकी राष्ट्रिय अजेंसियों से सघन जांच होनी चाहिए। पहले शाहीन बाग और अब निजामद्दीन के साथ आम आदमी पार्टी के नेताओं का खड़े होना किस ओर इशारा करता है, सामने आना ही चाहिए।
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नई दिल्ली:
निजामुद्दीन मरकज में देश के तमाम राज्यों से लोग आए थे. आज सुबह चार बजे तक चले तलाशी अभियान के बाद यहां से 2361 लोगों को निकाला गया है. यहां कई विदेशी और भारतीय नागरिक मिले, जो छुपकर रह रहे थे.
वहीं दिल्ली के वजीराबाद जामा मस्जिद में निजामुद्दीन मरकज के 15 लोग छुपकर रह रहे थे, जिसमें 12 इंडोनेशियाई है और 3 भारतीय हैं. 21 मार्च को ये 15 लोग मरकज से वजीराबाद आ गए थे. फिलहाल सभी को मस्जिद में ही क्वारंटीन कर दिया गया है.
दिल्ली के मानसरोवर पार्क में भी 9 लोग मिले हैं, जो मरकज से यहां छुपकर रह रहे थे. 9 में से 7 म्यांमार के हैं और 2 असम के हैं. पुलिस अभी मौके पर ही मौजूद है और लोगों की तलाश कर रही है.
बता दें कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने निजामुद्दीन मरकज मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि सुबह 4 बजे तक कार्रवाई हुई है. 2361 लोगों को निजामुद्दीन मरकज से निकाला गया है और 617 लोगों को हॉस्पिटल भेजा गया है. जिन लोगों को खांसी या सर्दी की शिकायत थी उन्हें तत्काल अस्पताल भेजा गया है. बाकी लोगों को क्वारंटीन किया गया है.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं इस मरकज में शामिल सभी लोगों से कहना चाहूंगा कि आप सब सामने आएं. अगर छुपाकर रखेंगे तो आपके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सड़कों पर भीड़ जमा होना, राष्ट्रीय आपदा कानून के तहत अपराध माना जाएगा और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.