प्रियंका से मिल कर “भीमा कोरेगांव” क्यूँ दोहराना चाहते हैं चंद्रशेखर?

उत्तर प्रदेश में आक्रामक दलित राजनीति के सितारे हैं चन्द्रशेखर रावण, जिनहोने अभी कहा है “यदि अवशयकता पड़ी तो भीमा कोरेगांव दोहरा देंगे”। भीम आर्मी के प्रमुख स्वयम को राजनीति परिदृश्य पर मायावती के बाद का नेता देखते हैं और माया के लिए मन में सम्मान भी रखते हैं पर कुछ शर्तों के साथ। चंद्रशेखर अन्य राजनेताओं की तरह कोई भी मौका नहीं चूकते, और वह जानते हैं की कब क्या और कैसे कहना है।

अभी हाल ही में उन्होने देवबंद में चुनावप्रचार के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन किया था जिस कारण उन्हे राजनैतिक हिरासत में रखा गया और वहीं से उनकी तबीयत खराब होने के कारण मेरठ भेज दिया गया। स्वस्थ्य लाभ कर रहे चंद्रशेखर से माया और अखिलेश ने एक सुरक्षित राजनैतिक दूरी बना रखी है, लेकिन चन्द्रशेखर स्वयं को उनका अनुगामी ही मानते हैं।

अब प्रियंका उन्हे मिलने आतीं हैं, एक युवा जिसे योगी पुलिस ने प्रताड़ित किया जब व देवबंद में अपनी चुनावि रैली चला रहे थे। एक युवा की आवाज़ दबाने की कोशिश की गयी योगी पुलिस द्वारा। ऐसे में प्रियंका बहिन ने चंद्रशेखर का हाल पूछा। तब तक चुनाव न लड़ने की कसं खाने वाले चंद्रशेखर ने प्रियंका के आने से की जोश पाया यह तो वही जानें परंतु अगले ही दिन उन्होने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी और ज़रूरत पड़ने पर भीमा कोरेगांव हत्याकांड दोहरा देने की बात भी कह दी।

भीमा कोरेगांव में आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसे ज़रूरत पड़ने पर दोहराया जा सकता है। भीमा कोरेगांव का इतिहास मराठों और अंग्रेजों के युद्ध की गाथा में पाया जाता है जहां 300 अग्रेज़ सैनिकों ने 500 महार जाती के लोगों की मदद से 23000 मराठों को प्रभात वेला में हमला कर खदेड़ दिया था अंग्रेजों ने यहाँ 23000 मराठों को 800 सैनिको द्वारा खदेड़े जाने के उपलक्ष्य में एक समारक भी बनाया हुआ ही जिसे वह एंग्लो – मराठा युद्ध विजय समारक के रूप में मानते हैं। लेकिन यहाँ का दलित समुदाय उसे ब्राह्मणों पर दलितों की विजय के रूप में देखता है और प्रत्येक वर्ष वहाँ उत्सव मनाता है।

यहाँ पिछले वर्ष हुए कार्यक्र्म में दलित नेता जिग्नेश मेवानी के साथ भारत तेरे टुकड़े होंगे इनशाल्लाह इनशाललह गैंग वाला ओमर खालिद भी शामिल था जहां इन दोनों ने राष्ट्र विरोधी बातें कहीं और भड़काऊ भाषण दिया जिससे हिंसा भड़क उठी। इन दोनों पर पुणे में एफ़आईआर भी दर्ज की गयी थी।

पुणे ने हिंसा का एस तांडव अंग्रेजों के रहते हुए भी नहीं देखा था।

अब प्रश्न यह है कि प्रियंका चंद्रशेखर द्वारा उत्तरप्रदेश में भीमा कोरगांव क्यों दोहराना चाहेंगीं ??

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