पंचकुला में 5 साल की मासूम का बलात्कार कर हत्या की

ख़बर विडियो और फोटो : कपिल नागपाल

अभी काश्मीर में हुए जधन्य अपराध की रिपोर्ट की सियाही सूखी भी नहीं थी कि पंचकुला से वैसी ही एक शर्मनाक घटना की हबर आ गयी। यहाँ भी 5 साल की मासूम को मरने से पहले वैसी ही तकलीफ से गूज़रना पड़ा।

मौके पर मौजूद पुलिस ।

5 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद कि निर्ममता से की हत्या।


जानकरी के मुताबिक पंचकूला के सेक्टर-14 स्थित लिटिल फ्लावर कान्वेंट स्कूल के सामने बसीं झुग्गियों में रहने वाली पांच साल की बच्ची के साथ दरिंदे ने रेप कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी|फिलहाल पुलिस ने इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने वाले आरोपी को दबोच लिया है| पुलिस का कहना है कि मामले की गहनता से छानबीन कर आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी|

सतगुरु बाबा हरदेव सिंह महाराज को निरंकारी मिशन द्वारा दी श्रद्धांजलि

संत निरंकारी मिशन द्वारा  13 मई 2019 को बाबा हरदेव सिंह महाराज को पिंजौर में श्रद्धांजलि दी गई इस दिन को समर्पण दिवस का नाम दिया गया सतगुरु रूप में संत निरंकारी मिशन का 36 वर्षों तक मार्गदर्शन किया और 3 वर्ष पूर्व इसी दिन आपने अपने साकार रूप का त्याग करके निरंकार रूप में विलीन हो गए 

समर्पण दिवस पर निरंकारी भगत संसार भर में समागम अथवा विशेष सत्संग कार्यक्रम आयोजित करते हैं मानवता के अध्यात्मिक और सामाजिक कल्याण के लिए बाबा जी की अमूल्य देन को याद करते हुए उनकी शिक्षाओं को संसार के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए अपने आप को पुनः समर्पित करते हैं ताकि अज्ञानता के अंधकार को ब्रह्म ज्ञान के प्रकाश द्वारा दूर किया जा सके समर्पण दिवस सत्संग आज पिंजौर के संत निरंकारी सत्संग भवन में किया गया 

बाबाजी के युग में बिशन की आदित्य विस्तार हुआ बाबा जी ने मिशन के संदेश को देश के कोने कोने तक पहुंचाने के लिए हर प्रकार के संचार साधनों का प्रयोग किया जहां प्रचार को की संख्या में वृद्धि हुई 

सतगुरु बाबा हरदेव सिंह महाराज स्वयं भी साल के 200 से अधिक दिनों तक कल्याण यात्रा पर ही रहते थे जिसके फलस्वरूप देश के कोने कोने में सत्संग के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे जहां भगत दूर-दूर से उम्र कराते थे हजूर का हर कार्यक्रम एक विशाल समागम का रूप धारण कर लेता था

इसी प्रकार दूर देशों में भी मिशन का उल्लेखनीय विकास हुआ 1980 में जब बाबाजी ने सतगुरु रूप में मिशन की बागडोर संभाली तो भारत से बाहर 17 देशों में निरंकारी मिशन की शाखाएं थी बाबा जी के प्रेम  व अपनत्व के कारण आज पूरे वर्ल्ड में 60 देशों में निरंकारी मिशन की शाखाएं है

बाबा हरदेव सिंह जी ने मिशन के युवा वर्ग को भी उत्साहित किया ताकि वह आगे आए और बिना अपने वातावरण अथवा रहन-सहन के तरीकों को त्याग किए मिशन की गतिविधियों में भाग ले और कुछ जिम्मेदारियां निभाए बाबा जी ने विशेष तौर पर युवा वर्ग को समाज कल्याण के कार्यों में अधिक से अधिक योगदान देने के लिए प्रेरित किया आज सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने दूर देशों में निरंकारी यूथ सिंपोजियम आयोजित कर रहे हैं और जिन में हजारों की संख्या में युवा वर्ग भाग ले रहा है मिशन के संदेश को आगे से आगे पहुंचाने के लिए योगदान दिया जा रहा है

संत निरंकारी मिशन का पहला रक्तदान शिवर सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के समय में नवंबर 1986 में आयोजित किया गया जैसे आज पूरे वर्ल्ड में निरंकारी मिशन द्वारा 1036500 यूनिट  ब्लड इकट्ठा किया गया  और  6076 ब्लड डोनेशन कैंप लगाए गए बाबा जी ने ब्लड डोनेशन कैंप लगाए जाते हैं

केजरीवाल को पंजाब में दिखाये गए काले झंडे

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद क्र्जरिवल की राजनीति भी कमाल है वह दिल्ली में कांग्रेस से गठबंधन के लिए रिरियाते दीख पड़ते हैं वहीं हरियाणा में जेजेपी से कांग्रेस के खिलाफ गठबंधन करते हैं ओर पंजाब में तो अकेले ही मैदान में उतर पड़ते हैं। वैसे उनका विरोध मोदी से भी है। पंजाब में वह हरियाणा को पानी नहीं देने की बात करते हैं और हरियाणा में वह केंद्र को जल संसाधनो के ठीक से वितरण न करने का दोशी बताते हैं। पिछले विधान सभा चुनावों में उन्होने पंजाब को नशे का स्वर्ग बताया था और पंजाब के युवाओं को नशे का आदि बता कर वोट मांगे थे, वहीं भगवंत मान आम आदमी पार्टी के सांसद के साथ कोई शराब की बदबू के कारण बैठना भी पसंद नहीं करता था। मजीठीया पर “चिट्टे का सौदागर” कह कर चुनावों में उनके खिलाफ मोर्चा खोला था तो केस होने पर लिखित माफी भी मांगी थी। पंजाब उनके इस आचरण को भूला नहीं है।

संगरूर: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को पंजाब में आम आदमी पार्टी  के प्रचार अभियान की शुरुआत की लेकिन, उनका स्वागत काले झंडों से किया गया. केजरीवाल संगरूर से आप के उम्मीदवार भगवंत मान के लिए प्रचार कर रहे थे. राज्य को मादक पदार्थो के नाम पर बदनाम करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने केजरीवाल के खिलाफ नारे लगाए और उन्हें वापस जाने को कहा.

एक प्रदर्शनकारी गुरिंदर सिंह ने कहा, “पिछले लोकसभा चुनाव में केजरीवाल ने पंजाब को यह कहकर बदनाम किया था कि यह ‘मादक पदार्थो का स्वर्ग है’ और ‘यहां के युवा नशे के आदी हैं’. बाद में, उन्होंने पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से उनके खिलाफ मादक पदार्थो के कारोबार में संलिप्त होने के आरोप लगाने को लेकर बिना शर्त माफी मांगी थी.” उसने कहा, “मजीठिया से माफी मांगने के बजाए उन्हें पंजाब के लोगों से बार-बार और लगातार झूठ बोलने के लिए माफी मांगनी चाहिए थी.”

अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल, मजीठिया के बहनोई हैं और पिछली राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. आप संयोजक शुक्रवार तक पंजाब में चुनाव प्रचार करेंगे. लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को राज्य के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होना है.

सिद्धू की वाणी को जबरन विराम मिला

नई दिल्ली:

मोदी को गालियां बकते बकते वह कब पंजाब के मुख्यमंत्री को भी अपने शब्द बाणों से घायल कर गए यह बहुत बोलने वाले मियां बीवी को पता ही नहीं चला।
कांग्रेस के स्टार प्रचारक नवजोत सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने कहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रदेश की सभी 13 सीट पर जीत का विश्वास है फिर प्रदेश में सिद्धू के चुनाव प्रचार की क्या जरूरत है। डॉ. सिद्धू शनिवार को पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार गुरजीत सिंह औजला के चुनाव प्रचार के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहीं थीं।
अब हालात यह हैं की उन्हे अपने ध्वनि यंत्र अथवा वोकल कॉर्ड वजह से छुट्टी लेनी पड़ रही है। वैसे भी सभी ने सुनील जाखड़ को भविष्य का मुख्य मंत्री मान लिया है ऐसे में सिद्धू की वाणी को विराम लगना बनता है।

लोकसभा चुनाव 2019 के 6 चरणों का मतदान हो चुका है. 19 मई को सातवें चरण का मतदान होना बाकी है. इसी बीच कांग्रेस को एक झटका लगा है. कांग्रेस नेता और पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का गला खराब हो गया है. लोकसभा चुनाव के दौरान सिद्धू अपने विवादास्‍पद बयानों, तुकबंदी और जुमलों से चुनाव माहौल को गरम बनाए हुए थे. अचानक गला खराब हो जाने से कांग्रेस और सिद्धू दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. 19 मई को  पंजाब की 13 लोकसभा सीटों पर भी वोटिंग होनी है. पंजाब में जीत के लिए सभी राजनैतिक पार्टियां इन दिनों जमकर प्रचार कर रही हैं.

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Navjot Singh Sidhu’s office: Navjot Singh Sidhu put on steroid medication and injections due to continuous speech damaging his vocal cords. At the moment Mr. Sidhu is under the medication & in process of a quick recovery to return-back to campaigning at the earliest. (file pic)3872:32 PM – May 13, 2019513 people are talking about thisTwitter Ads info and privacy

कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) भी अपनी पार्टी को जीत दिलाने के लिए ताबड़तोड़ प्रचार कर रहे थे. अचानक नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) को लेकर अब एक खबर आ रही है कि रैलियों में भाषण दे देकर उनका गला खराब हो गया है और वो इसका इलाज करा रहे हैं.नवजोत सिंह सिद्धू के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि, लगातार प्रचार की वजह से सिद्धू का गला खराब हो गया है. जिसके बाद डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं. जारी बयान में कहा गया है कि ‘वह जल्द ही चुनाव प्रचार के लिए वापस आएंगे.

अमर सिंह की नवजोत को नसीहत:
पीएम नरेंद्र मोदी(PM Modi) पर कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू(Navjot Singh Sidhu) के लगातार तीखे हमलों ने राज्यसभा सांसद अमर सिंह(Amar Singh) को बेचैन कर दिया है.उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू पर करारा हमला बोला है. नरेंद्र मोदी पर तीखे बयानों को लेकर सिद्ध को संबोधित करते हुए अमर सिंह ने कहा है कि अगर आसमान पर थूकोगे तो थूक चेहरे पर ही गिरेगा. देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री को अपशब्द बोलना शोभा नहीं देता. अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट किए वीडियो में अमर सिंह ने कहा है कि राजनीति में विवाद स्वाभाविक है. नरेंद्र मोदी का भी गुजरात में शंकर सिंह बाघेला और केशुभाई पटेल से विवाद हो चुका, मगर उन नेताओं के बारे में नरेंद्र मोदी ने कभी गलत बातें नहीं कहीं. खुद का केस बताते हुए अमर सिंह ने कहा कि उन्हें समाजवादी पार्टी से दो-दो बार निकाला गया, मगर आपको तो नहीं निकाला गया. सिर्फ बीजेपी ने अरुण जेटली के लिए टिकट काटा. बावजूद इसके आपकी पीड़ा को समझते हुए बीजेपी ने राज्यसभा भेजा. आपने इसे स्वीकार भी किया. फिर कांग्रेस में जाने के लिए आपने राज्यसभा से इस्तीफा भी दे दिया.यह आपका अधिकार भी है. मैं आपको जेंटलमैन समझता रहा. मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं. 

एक खबर के मुताबिक कांग्रेस के स्टार प्रचारक माने जाने वाले सिद्धू ने लोकसभा चुनाव के दौरान 28 दिनों में 80 राजनैतिक रैलियों को संबोधित किया है. लगातार रैलियों में बोलने की वजह से उनका गला खराब हो गया . जिसके बाद डॉक्टर उन्हें स्टेरॉयड की दवा और इंजेक्शन दे रहे हैं.

सिद्धू को 14 मई को बिहार और 15 मई को बिलासपुर में रैली करनी थी. जो अब शायद स्थगित करनी करनी पड़े. 16 मई और 17 मई को वह एमपी में भी रैली करने वाले थे. गला खराब होने के बाद सिद्धू और कांग्रेस के लिए यह झटके के रूप में देखा जा रहा है.

हिंदू विरोध से जीत के दिवास्वप्न दखने वाले एक और नेता कमल हस्सन

कई राष्ट्रिय पुरसकारों से सम्मानित एक दिग्गज अभिनेता कमाल हस्सन ने एक मंच से अपने सालों से अर्जित ज्ञान को बघारा। विस्मय है कि इतने सूझवान नेता को हत्या और आतंक में भेद करने लायक सामर्थ्य नहीं है। यह उनकी राजनैतिक विवशता थी क्योंकि वह मुस्लिम बहुल इलाके में चुनावी रेल कर रहे थे ओर सामने गांधी कि प्रतिमा भी थी। बाद में उन्होने इसी बात का बहुत भोथरा स्पष्टीकरण देने का भी प्रयास किया जिससे उनकी मनो:स्थिति का पता चलता है। मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) के संस्थापक कमल हासन ने यह कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया है कि आजाद भारत का पहला ‘‘आतंकवादी हिन्दू’’ था. वह महात्मा गांधी की हत्या करने वाले, नाथूराम गोडसे के संदर्भ में बात कर रहे थे. हस्सन मोदी विरोध कि राजनीति करने मैदान में उतरे हैं और उन्हे लगता है मोदि विरोध ही उनकी चुनावी वैतरणी पार लगायेगा।

सनद रहे नाथुराम गोडसे ने महात्मा गांधी कि हत्या कि थी, नाथुराम को इतिहास एक हत्यारे के रूप में जानता है न कि एक आतंकी के रूप में आज कमल हस्सन स्वयं को इतिहास आरों ओर अदालतों से अधिक श्रेष्ठ जताने कि चेष्टा कर रहे हैं। वह यह बताते दिख रहे हैं कि उस समय के लोगों को हत्या ओर आतंक के बीच ठीक उसी तरह फर्क नहीं पता था जैसे आज काँग्रेस को हत्या ओर शहादत के बीच फर्क नहीं मालूम

अरवाकुरिचि (तमिलनाडु): मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) के संस्थापक कमल हासन ने यह कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया है कि आजाद भारत का पहला ‘‘आतंकवादी हिन्दू’’ था. वह महात्मा गांधी की हत्या करने वाले, नाथूराम गोडसे के संदर्भ में बात कर रहे थे. रविवार की रात एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए हासन ने कहा कि वह एक ऐसे स्वाभिमानी भारतीय हैं जो समानता वाला भारत चाहते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं ऐसा इसलिए नहीं बोल रहा हूं कि यह मुसलमान बहुल इलाका है, बल्कि मैं यह बात गांधी की प्रतिमा के सामने बोल रहा हूं. आजाद भारत का पहला आतंकवादी हिन्दू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे है. वहीं से इसकी (आतंकवाद) शुरुआत हुई.’’ महात्मा गांधी की 1948 में हुई हत्या का हवाला देते हुए हासन ने कहा कि वह उस हत्या का जवाब खोजने आये हैं.

Kamal Haasan during campaigning in Aravakurichi assembly constituency, Tamil Nadu, yesterday: “I am not saying this because many Muslims are here. I’m saying this in front of Mahatma Gandhi’s statue. First terrorist in independent India is a Hindu, his name is Nathuram Godse.” pic.twitter.com/LSDaNfOVK01,70210:13 AM – May 13, 2019Twitter Ads info and privacy1,697 people are talking about this

कमल हासन इससे पहले भी दक्षिणपंथी चरमपंथ पर निशाना साध चुके हैं. करीब डेढ़ साल पहले इस संबंध में उन्‍होंने एक विवादित लेख भी इस विषय पर लिखा था. उसमें उन्‍होंने लिखा था कि दक्षिणपंथी समूहों ने हिंसा का दामन इसलिये थामा क्योंकि उनकी पुरानी ”रणनीति” ने काम करना बंद कर दिया है. हसन ने तमिल पत्रिका ‘आनंद विकटन’ के अंक में अपने स्तंभ में आरोप लगाया था कि दक्षिणपंथी संगठनों ने अपने रुख में बदलाव किया है, हालांकि उन्होंने इसमें किसी का नाम नहीं लिया है.

कमाल हसन के इस वक्तव्य का विवेक ओबेरॉय ने खुल कर विरोध जताया है।

समर्थन वापिस लेने की चुनौती पर बिफरीं मायावती

अलवर बलात्कार मामले में प्रधान मंत्री मोदी ने मायावती को चुनौती दी की यदि वह सच में दलित हितैषी हैं तो राजस्थान में कांग्रेस को जो समर्थन दीं हुयी हैं उसे वापिस लेलें। इस चुनौतीको मायावती ने अपने आप पर ओर अपनी दलित प्रेम की नीतियों पर प्रत्यक्ष चोट माना और बौखलाहट में मायावती ने कहा, ‘पीएम मोदी ने कल जो यहां नकली दलित प्रेम दिखाने की ड्रामेबाजी की है, उससे चुनाव में कुछ हासिल होने वाला नहीं है. अभी सहारनपुर कांड को लोग भूले नहीं हैं. हैदराबाद में रोहित वेमुला के साथ क्या हुआ और गुजरात में दलितों के साथ जितने उत्पीड़न क मामले सामने आए, वह किसी से छिपा हुआ नहीं है. उत्तर प्रदेश में भी हर रोज दलित उत्पीड़न हो रहा है इस पर चुप्पी साधे हुए हैं.’ मायावती इतना बौखला गईं की उनके छद्म कांग्रेस विरोध का पर्दाफाश हो गया अब वह कुच्छ भी कहेंगी, जिसका आने वाले चुनावों पर पूरा पूरा असर होगा।

लखनऊ: अलवर गैंगरेप (Alwar Gangrape) मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra modi) की ओर से आए बयान पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने उन्हें आड़े हाथों लिया है. सोमवार को मायावती ने कहा, ‘पीएम मोदी ने कल जो यहां नकली दलित प्रेम दिखाने की ड्रामेबाजी की है, उससे चुनाव में कुछ हासिल होने वाला नहीं है. अभी सहारनपुर कांड को लोग भूले नहीं हैं. हैदराबाद में रोहित वेमुला के साथ क्या हुआ और गुजरात में दलितों के साथ जितने उत्पीड़न क मामले सामने आए, वह किसी से छिपा हुआ नहीं है. उत्तर प्रदेश में भी हर रोज दलित उत्पीड़न हो रहा है इस पर चुप्पी साधे हुए हैं.’

‘यूपी में दलित उत्पीड़न पर चुप क्यों हैं पीएम?’
बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि जिन बीजेपी शासित राज्यों में दलित उत्पीड़न हुए वहां मुख्यमंत्रियों से इस्तीफे क्यों नहीं लिए गए. इन सब मामलों में नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए कभी भी इस्तीफे की पेश नहीं की गई. अलवर में हुई दलित उत्पीड़न की घटना को लेकर पीएम मोदी चुप थे, लेकिन मेरे बोलने के बाद अब चुनाव में घृणित लाभ लेने की कोशिश का रहे हैं. 

‘पीएम मोदी गरीब होने का नाटक कर रहे हैं’
उन्होंने कहा कि ये क्या बात करेंगे, ये अपनी ख़राब हुई राजनीतिक स्थिति को देखते हुए आये दिन अपना जाती बदल रहे हैं. अब अपनी जाती गरीब बता रहे हैं. गरीब की कभी चिंता नहीं की और 15 लाख रुपए अकाउंट में डालने की बात को जुमलेबाजी कहके पल्ला झाड़ रहे हैं. नोटबांडी करके गरीबों को परेशान किया. पीएम मोदी न तो गरीब हैं न फ़कीर हैं. गरीब होने का नाटक कर रहे हैं, ताकि इन्हें वोट मिल सके. 

‘जन्मजात अति पिछड़ी जाति से नहीं हैं पीएम मोदी’
मायावती ने कहा कि पीएम मोदी अपने को अति पिछड़ी जाती का बताते हैं. वास्तव में ये जन्मजात पिछड़ी जाती के नहीं हैं. इन्होंने गुजरात में अपने शासन में अपनी जाती को पिछड़े वर्ग में शामिल करा लिया है, क्योंकि अगर ये दलित होते तो दलितों के बंगले इनको अखरते नहीं. इन्हें अखरता है कि दलित बंगले में कैसे रह रहा है. वैसे अब इनके कुछ ही दिन बचे हैं. अपनी मन मर्यादा टाक पर रख दी है.

‘मैं झांसे में नहीं आई तो तीखे हमले करने लगे पीएम मोदी’
बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि इस बार बीजेपी और पीएम मोदी को केंद्र की सत्ता से बहार रखना होगा. इन्होंने गठबंधन तोड़ने की कोशिश की और मुझे आदरणीय बहन मायावती जी पुकारे और जब मैंने मुहतोड़ जवाब दिया तो अब बुआ-बबुआ पर उतर आये. जो संस्कारी लोग हैं वो पूरे सम्मान के साथ मुझे बहनजी पुकारते हैं और मेरे माता पिता भी मुझे बहनजी बुलाते हैं और अखिलेश जी मुझे बहन जी ही बुलाते हैं. लोगों को मोदी जी के दोहरे चरित्र से सावधान रहना चाहिए.

कांग्रेस शासित प्रदेश में दलितों को “न्याय” नहीं

बलात्कार पर राजनीति कोइ अच्छी बात नहीं लेकिन अशोक गहलोत ने चुनावों तक मामला दर्ज़ ही न होने देने की चाल चल कर राजनीति को हवा दे दी। हर जगह अवार्ड वापीसी गैंग, दलित प्रेमी नेताओं को ढूंढा जाने लगा। च्ंकि यह मामला राजस्थान का था जहां कांग्रेस की सरकार है कोई भी सामने नहीं आया, यहाँ तक कि आतिशी कि झूठी शियायात पर हायतौबा मचाने वाला महिला कमीशन अथवा ह्यूमन राइट्स अमिशन को भी कांग्रेस सरकार में दलित मनुष्य नहीं लगे। आ जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मायावती जो हमेशा केएचडी को दलितों का झंडाबरदार मानतीं हैं से ने दलित प्रेम ए बारे मेन पूछा तो यह सभी खोये हुए लोग बरसाती मेंढ़कों कि तरह निकलने लग पड़े।

देवरिया/कुशीनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि बसपा अध्यक्ष मायावती को अगर अलवर में हुए सामूहिक बलात्कार काण्ड से वाकई पीड़ा हो रही है, तो वह राजस्थान सरकार से समर्थन वापस लें. पीएम मोदी ने देवरिया और कुशीनगर में हुए चुनावी रैलियों में कहा कि राजस्थान की सरकार बसपा के सहयोग से चल रही है. वहां की कांग्रेस सरकार दलित बेटी से सामूहिक बलात्कार का मामला दबाने में लगी है. बहनजी (बसपा प्रमुख मायावती) राजस्थान में आपके समर्थन से सरकार चल रही है. वहां दलित बेटी से बलात्कार हुआ है. आपने उस सरकार से समर्थन वापस क्यों नहीं लिया? घड़ियाली आंसू बहा रही हो.’ 

उन्होंने कहा कि आपके (मायावती) साथ गेस्ट हाउस कांड पर पूरे देश को पीड़ा हुई थी. आज अलवर कांड पर आपको पीड़ा क्यों नहीं हो रही है. अगर हो रही है तो बयानबाजी करने की बजाय राजस्थान सरकार से समर्थन वापस लीजिये.’ मोदी ने रैली में मौजूद लोगों से पूछा ‘आतंकवादियों को घर में घुसकर मारा गया. आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ. माथा ऊंचा हुआ कि नहीं हुआ. सीना चौड़ा हुआ कि नहीं हुआ. ये चुनाव देश में एक बुलंद सरकार देने का चुनाव है. 21वीं सदी में भारत का विश्व में क्या स्थान हो, उसके लिये यह चुनाव है. यही कारण है कि देश आज राष्ट्र के हितों को सर्वोपरि रखने वाली सरकार केन्द्र में चाहता है.’ 

पीएम मोदी ने कहा कि आतंक से निपटना सपा, बसपा के बस की बात ही नहीं है और बाजार में प्रधानमंत्री के जितने चेहरे घूम रहे हैं. उनमें हिम्मत के साथ सीना तानकर आतंकवाद के खिलाफ कौन लड़ सकता है. सपा, बसपा और कांग्रेस वाले ऐसे लोग हैं, जो गली के गुंडे तक पर लगाम नहीं लगा पाते, ये आतंकवाद पर कैसे लगाम लगाएंगे.

पीएम ने कहा कि मैं अति पिछड़ी जाति में पैदा हुआ लेकिन देश को दुनिया में सबसे आगे ले जाने के लिये जी-जान से जुटा हुआ हूं. जो लोग मोदी की जाति जानना चाहते हैं, वे कान खोलकर सुन लें. मोदी की एक ही जाति है गरीब. ये लोग मोदी का नहीं, बल्कि गरीबी की जाति का सर्टिफिकेट मांग रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि सपा, बसपा के लोगों ने गरीबों को लूट कर बड़े—बड़े महल खड़े कर लिये लेकिन मैंने कभी जोड़-तोड़ करके अमीर बनने का सपना नहीं देखा और ना ही अपने परिवार वालों को दिखाया है. जब 20-25 साल बाद मेरा शरीर कमजोर हो जाएगा तब मुझे रहने के लिये किराये का कमरा ढूंढना पड़ेगा.

उन्होंने सपा और बसपा के बीच नाराजगी पनपने का दावा करते हुए कहा कि बहनजी सपा के कार्यकर्ताओं से नाराज हैं इसलिए उनको माइक पर सलाह देती हैं कि बसपा वालों से सपा को सीखने की जरूरत है. स्वार्थ का साथ ज्यादा नहीं चलता है. मैं सोचता हूं कि 23 मई को बहनजी के समर्थकों का क्या होगा, तब उनकी दोस्ती चूर-चूर हो जाएगी. तब बबुआ के कार्यकर्ता बुआ के कार्यकर्ताओं से ऐसी दुश्मनी निकालेंगे कि बहनजी भी कुछ नहीं कर पाएंगी.’ मोदी ने कहा कि विपक्षी दल लोकसभा चुनाव में चारों खाने चित हो जाएंगे क्योंकि लोगों ने एक मजबूत और ईमानदार सरकार बनाने की ठान ली है.

प्रियंका वाड्रा द्वारा अपमानित नीलम मिश्रा ने दल बल सहित छोड़ी कांग्रेस

एक होती है नूरा कुश्ती इस कुश्ती में दो भिड़ने वाले पहलवान आपस ही में तय कर लेते हैं की कोई भी चित्त नहीं होगा या फिर कौन चित्त होगा। हम नूरा कुश्ती पहले भी समाजवादी परिवार में होती देख चुके हैं। अब गठबंधन और कांग्रेस में भी नूरा कुश्ती ही चल रही है। अभी हाल ही में बदोही में भी यही कुश्ती एक बार फिर दोहराई गयी, जहां जिले की कांग्रेस अध्यक्ष नीलम मिश्रा ने कांग्रेस छोड़ दी ओर गठबंधन के उम्मीदवार के हित में जुट गयी। इसे कहते हैं तेल गिरा तो कड़ाही में। एक ओर बात जो सामने आ रही है वह है नामदारों का अपने कार्यर्ताओं के प्रति रवैया। अभी सैम पित्रोदा के दिल्ली में सिक्ख कत्लेआम पर दिये गए ब्यान “हुआ तो हुआ” थमा नहीं की प्रियंका वादरा आ महिलाओं के लिए दिया गया यह बयान। जानते हैं पूरा मामला

भदोही: लोकसभा चुनाव 2019  के छठवें चरण में रविवार को सात राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हुआ. इस दौरान उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की कांग्रेस अध्यक्ष नीलम मिश्रा ने पूर्वी यूपी की प्रभारी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. नीलम मिश्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने भदोही से एक बाहरी व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया है. इस बारे में जब हमने प्रियंका गांधी से बात की तो उन्होंने कई अपमानजनक बातें कहीं.  

आरोप है कि शुक्रवार को यहां हुई चुनावी सभा के बाद उन्होंने प्रियंका से शिकायत की थी कि भदोही से पार्टी के प्रत्याशी रमाकांत यादव लगातार जिला कांग्रेस कमेटी की उपेक्षा कर रहे हैं। यहां तक कि रैली में पार्टी पदाधिकारियों को घुसने तक नहीं दिया जा रहा है। 

इसपर प्रियंका गांधी ने कथित रुप से नीलम मिश्रा क सबके सामने डांटना शुरु कर दिया और कहा कि ‘अगर आप लोग अपमानित महसूस कर रहे हैं तो करते रहिए’। 

नीलम मिश्रा ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी से शनिवार को इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि भदोही से रमाकांत यादव को उम्मीदवार बनाया गया है. वह बाहरी व्यक्ति हैं और हाल ही में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका था. नीलम ने दावा किया कि इस बारे में एक बैठक के दौरान हमने प्रियंका गांधी से बात करने की कोशिश भी की थी. लेकिन, प्रियंका गांधी नाराज हो गईं और हमारे लिए कई अपमानजनक बातें कहीं.   

बताते चलें कि रमाकांत यादव को चुनाव आयोग का नोटिस भी मिल चुका है. चुनाव आयोग ने अपने आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में जनता को बताने के लिए कहा था, जिसके लिए उम्मीदवारों को छोटे या बड़े अखबारों में इसे प्रकाशित करवाना था, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार रमाकांत यादव ने इसकी अनदेखी की थी. मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला निर्वाचन आयोग ने यादव को नोटिस भेजा था

आज का राशिफल

Aries

13 मई 2019: आज का दिन आपके मान प्रतिष्ठा को और अच्छा बनाने वाला होगा। जिससे आप उत्साहित होगे। संबंधित व्यापार में आपको और लाभ होगा। नौकरी पेशा के क्षेत्रों में तरक्की होगी। पुत्र/पुत्री के प्रति आपको और प्रेम होगा। किन्तु ननिहाल पक्ष के प्रति आपको चिंता होगी। जिससे परेशान होगे। धैर्य जरूरी होगा।

Taurus

13 मई 2019: आज का दिन आपके लिए कई मायनों में अच्छा होगा। जिससे आपके उत्साह में इजाफा होगा। तकनीक व प्रबंधन के कौशल की सराहना होगी। आपको अधिकारियों से पदोन्नति की सूचना प्राप्त होगी। निजी संबंधों में मधुरता होगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से आज का दिन अच्छा होगा। किन्तु संतान पक्ष से तनाव होगे।

Gemini

13 मई 2019: आज आप जहाँ रोजी-रोटी को और मजबूत बनाने की फिक्र में होगे। वहीं किसी प्रिय मित्र के साथ किसी यात्रा व प्रवास मे जाने का विचार होगा। हालांकि आप आज अपने सगे भाई के प्रति उदार होगे। यदि आप नौकरी करते है, तो कई कामों को पूरा करने का दवाब होगा। हालांकि आप इसे एक अवसर की तरह लेगे।

Cancer

13 मई 2019: आज आप कुछ परिवारिक कामों को अपने भाई से पूरा करने को कह देगे किन्तु, वह इसे पूरा करने मे दिलचस्प नहीं होगे। जिससे आप कुछ नाराज होगे। हालांकि आपको नौकरी पेशा के मामलों में बाहर जाना होगा। आज कुछ धन अधिक व्यय होगा। जिसे आप अपनी निजी समस्या मानकर परेशान होगे। धैर्य जरूरी होगा।

Leo

13 मई 2019: आज आप वैवाहिक जीवन के सुखों को समृद्ध करने के विचार में होगे। हालांकि आपको इस तरफ आज ध्यान देने का कम ही वक्त होगा। आज आप अपने व्यापारिक हिस्सेदारी को और विस्तार देने के लिए हस्ताक्षर कर देगे। जिससे आने वाले समय में फायदा होगा। सेहत में रौनकता होगी। किन्तु पिता से तनाव होगे।

Virgo

13 मई 2019: आज आप एक दोहरे लाभ अर्जित करने की नीति पर अमल कर सकते हैं। हालांकि आपको इसके लिए कुछ अपने संसाधनों व प्रबंधन को दुरूस्त करने की जरूरत होगी। यदि आप इन बातों में ठीक होगे। तो आपकी सोच से कहीं अधिक लाभ होना तय है। वैसे आज का दिन सेहत में सिर, आंख, गले की पीड़ाएं दे सकता है।

Libra

13 मई 2019: आज आप अपने स्तर पर कुछ ऐसे प्रभावी निर्णय लेगे। जिससे आज आपको धन लाभ होना तय होगा। आप यदि अपनी सक्रियता को कम नहीं करते हैं, तो आपको उम्मीदों से कहीं अधिक लाभ होगा। प्रेम संबंधों में आज आप दिलचस्प बातों को तेज कर देगे। संतान पक्ष से खुशी होगी। किन्तु ऋणों के भुगातान का दबाव होगा। 

Scorpio

13 मई 2019: आज अपने काम से अपने नाम को उॅचा उठाने में लगे होगे। आज आपके ग्रह शुभ व सकारात्मक हो चले हैं। जिससे आप इस तरफ और उत्साह पूर्वक कामों को करने में लगे होगे। आज आप पत्नी व बच्चों के साथ कुछ समय देगे। काम के साथ मनोरंजन को भी अहमियत देगे। हालांकि किसी वरिष्ठ व्यक्ति से डाट खानी होगी।

Sagittarius

13 मई 2019: आज आप अपने व्यापारिक क्षेत्रों में और बढ़त अर्जित करने के मूड़ में होगे। किन्तु आप आज कुछ ज्यादा तेजी का दौर नहीं अर्जित कर सकते हैं। क्योंकि कुछ न कुछ संसाधनों के साथ सही निर्णय व कर्मियों की कमी होगी। जिससे आपको परेशानी होगी। हालांकि आज सेहत में मानसिक व शारीरिक पीड़ाएं होगी। 

Capricorn

13 मई 2019: आज आप सुनहरे कल के निर्माण में अधिक तत्पर होगे। हालांकि आपको आज सफलता मिलना लगभग तय है। किन्तु कुछ कानूनी बातों का ध्यान रखते हुए ही खरीद करें। अन्यथा हानि होगी। धन निवेश व विदेश के कामों में लाभ की स्थिति होगी। किन्तु सेहत में सिर, कंधे, व नांक के रोग होगे। जिससे दवा लेनी होगी। 

Aquarius

13 मई 2019: आज आप किसी प्रतिष्ठति संस्था के साथ आपसी हितों के समझौतों को अंतिम रूप देगे। आज जरूरी दस्तावेजों में हस्ताक्षर भी होगे। आज आपका स्वास्थ्य बेहतर बना हुआ होगा। दाम्पत्य जीवन में खुशी की लहर होगी। किन्तु किसी रिश्तेदार व परिवार के व्यक्ति के प्रति कुछ चिंता होगी। शत्रु पक्ष से परेशान होगे।

Pisces

13 मई 2019: आज अपने व्यवसाय को और समृद्ध करने के कई पहलुओं पर तेजी से अमल कर सकते है। हांलांकि आपको आज किसी दूर-दराज के क्षेत्रों की यात्रा में जाना होगा। जिससे आप आज अपने स्तर पर कुछ कामों को अपने निकट अधिकारी को सौंप देगे। धन निवेश मे फायदा होगा। किन्तु सेहत के मामलों आपको दवा लेनी होगी।

भगवती माँ जानकी सीता नवमी

सीता नवमी ( जानकी जयंती )

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता नवमी या जानकी नवमी  कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन सीता जी  का प्राकट्य हुआ था इसीलिए यह पर्व माँ सीता के जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है। भगवान श्रीराम की अर्द्धांगिनी देवी सीता जी का जन्मदिवस फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को तो मनाया जाता ही है परंतु वैशाख मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को भी जानकी-जयंती के रूप में मनाया जाता है क्योंकि रामायण के अनुसार वे वैशाख में अवतरित हुईं थीं, किन्तु ‘निर्णयसिन्धु’ के ‘कल्पतरु’ ग्रंथानुसार फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष के दिन सीता जी का जन्म हुआ था इसीलिए इस तिथि को सीताष्टमी के नाम से भी संबोद्धित किया गया  है अत: दोनों ही तिथियाँ उनकी जयंती हेतु मान्य हैं तथा दोनों ही तिथियां हिंदू धर्म में बहुत पवित्र मानी गई हैं। इस दिन वैष्णव संप्रदाय के भक्त माता सीता के निमित्त व्रत रखते हैं और पूजन करते हैं। मान्यता है कि जो भी इस दिन व्रत रखता व श्रीराम सहित सीता का विधि-विधान से पूजन करता है, उसे पृथ्वी दान का फल, सोलह महान दानों का फल तथा सभी तीर्थों के दर्शन का फल अपने आप मिल जाता है। अत: इस दिन व्रत करने का विशेष महत्त्व है। 

शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन पुष्य नक्षत्र में जब महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से एक बालिका का प्राकट्य हुआ। जोती हुई भूमि को तथा हल की नोक को भी ‘सीता’ कहा जाता है, इसलिए बालिका का नाम ‘सीता’ रखा गया। 

सीता जन्म कथा सीता के विषय में रामायण और अन्य ग्रंथों में जो उल्लेख मिलता है, उसके अनुसार मिथिला के राजा जनक के राज में कई वर्षों से वर्षा नहीं हो रही थी। इससे चिंतित होकर जनक ने जब ऋषियों से विचार किया, तब ऋषियों ने सलाह दी कि महाराज स्वयं खेत में हल चलाएँ तो इन्द्र की कृपा हो सकती है। मान्यता है कि बिहार स्थित सीममढ़ी का पुनौरा नामक गाँव ही वह स्थान है, जहाँ राजा जनक ने हल चलाया था। हल चलाते समय हल एक धातु से टकराकर अटक गया। जनक ने उस स्थान की खुदाई करने का आदेश दिया। इस स्थान से एक कलश निकला, जिसमें एक सुंदर कन्या थी। राजा जनक निःसंतान थे। इन्होंने कन्या को ईश्वर की कृपा मानकर पुत्री बना लिया। हल का फल जिसे ‘सीत’ कहते हैं, उससे टकराने के कारण कालश से कन्या बाहर आयी थी, इसलिए कन्या का नाम ‘सीता’रखा गया था। ‘वाल्मीकि रामायण’ के अनुसार श्रीराम के जन्म के सात वर्ष, एक माह बाद वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को जनक द्वारा खेत में हल की नोक (सीत) के स्पर्श से एक कन्या मिली, जिसे उन्होंने सीता नाम दिया। जनक दुलारी होने से ‘जानकी’, मिथिलावासी होने से ‘मिथिलेश’ कुमारी नाम भी उन्हें मिले। वर्तमान में मिथिला नेपाल का हिस्सा हैं अतः नेपाल में इस दिन को बहुत उत्साह से मनाते हैं . वास्तव में सीता, भूमिजा कहलाई क्यूंकि राजा जनक ने उन्हें भूमि से प्राप्त किया था । 

वेदों, उपनिषदों तथा अन्य कई वैदिक वाङ्मय में उनकी अलौकिकता व महिमा का उल्लेख एवं  उनके स्वरूप का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है जहाँ ऋग्वेद में एक स्तुति के अनुसार कहा गया है कि असुरों का नाश करने वाली सीता जी आप हमारा कल्याण करें एवं इसी प्रकार सीता उपनिषद जो कि अथर्ववेदीय शाखा से संबंधित उपनिषद है जिसमें सीता जी की महिमा एवं उनके स्वरूप को व्यक्त किया गया है. इसमें सीता को शाश्वत शक्ति का आधार बताया गया है तथा उन्हें ही प्रकृति में परिलक्षित होते हुए देखा गया है. सीता जी को प्रकृति का स्वरूप कहा गया है तथा योगमाया रूप में स्थापित किया गया है.

सीता जी ही प्रकृति हैं वही प्रणव और उसका कारक भी हैं. शब्द का अर्थ अक्षरब्रह्म की शक्ति के रूप में हुआ है यह नाम साक्षात ‘योगमाया’ का है. देवी सीता जी को भगवान श्रीराम का साथ प्राप्त है, जिस कारण वह विश्वकल्याणकारी हैं. सीता जी जग माता हैं और श्री राम को जगत-पिता बताया गया है एकमात्र सत्य यही है कि श्रीराम ही बहुरूपिणीमाया को स्वीकार कर विश्वरूप में भासित हो रहे हैं और सीता जी ही वही योगमाया है.इस तथ्य का उदघाटन निर्णयसिंधु से भी प्राप्त होता है जिसके अनुसार  सीता शक्ति, इच्छा-शक्ति तथा ज्ञान-शक्ति तीनों रूपों में प्रकट होती हैं वह परमात्मा की शक्ति स्वरूपा हैं. 

इस प्रकार सीता माता के चरित्र का वर्णन सभी वेदों में बहुत सुंदर शब्दों में किया गया हैं । ऋग्वेद में वे असुर संहारिणी, कल्याणकारी, सीतोपनिषद में मूल प्रकृति, विष्णु सान्निध्या, रामतापनीयोपनिषद में आनन्द दायिनी, आदिशक्ति, स्थिति, उत्पत्ति, संहारकारिणी, आर्ष ग्रंथों में सर्ववेदमयी, देवमयी, लोकमयी तथा इच्छा, क्रिया, ज्ञान की संगमन हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने उन्हें सर्वक्लेशहारिणी, उद्भव, स्थिति, संहारकारिणी, राम वल्लभा कहा है। ‘पद्मपुराण’ उन्हें जगतमाता, अध्यात्म रामायण एकमात्र सत्य, योगमाया का साक्षात् स्वरूप और महारामायण समस्त शक्तियों की स्रोत तथा मुक्तिदायिनी कह उनकी आराधना करता है। ‘रामतापनीयोपनिषद’ में सीता को जगद की आनन्द दायिनी, सृष्टि, के उत्पत्ति, स्थिति तथा संहार की अधिष्ठात्री कहा गया है- 

श्रीराम सांनिध्यवशां-ज्जगदानन्ददायिनी। 
उत्पत्ति स्थिति संहारकारिणीं सर्वदेहिनम्॥

वाल्मीकि रामायण में भी देवी सीता को शक्ति स्वरूपा, ममतामयी, राक्षस नाशिनी, पति व्रता आदि कई गुणों से सज्जित बताया गया है । वाल्मीकि रामायण’ के अनुसार सीता राम से सात वर्ष छोटी थीं। ‘रामायण’ तथा ‘रामचरितमानस’ के बालकाण्ड में सीता के उद्भवकारिणी रूप का दर्शन होता है एवं उनके विवाह तक सम्पूर्ण आकर्षण सीता में समाहित हैं, जहाँ सम्पूर्ण क्रिया उनके ऐश्वर्य को रूपायित करती है। अयोध्याकाण्ड से अरण्यकाण्ड तक वह स्थितिकारिणी हैं, जिसमें वह करुणा-क्षमा की मूर्ति हैं। 

वह कालरात्रि बन निशाचर कुल में प्रविष्ट हो उनके विनाश का मूल बनती हैं। यद्यपि तुलसीदास ने सीताजी के मात्र कन्या तथा पत्नी रूपों को दर्शाया है, तथापि वाल्मीकि ने उनके मातृस्वरूप को भी प्रदर्शित कर उनमें वात्सल्य एवं स्नेह को भी दिखलाया है। इसलिए  सीताजी का जीवन  एक पुत्री, पुत्रवधू, पत्‍‌नी और मां के रूप में उनका आदर्श रूप सभी के लिए पूजनीय रहा है । 

मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम तथा माता जानकी के अनन्य भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी  ‘रामचरितमानस’ के बालकांड के प्रारंभिक श्लोक में सीता जी को ब्रह्म की तीन क्रियाओं उद्भव, स्थिति, संहार, की संचालिका तथा आद्याशक्ति कहते हुए नमस्कार करते हैं- 

उद्भव स्थिति संहारकारिणीं हारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामबल्लभाम्॥

अद्भुत रामायण का उल्लेख श्रीराम तथा सीता इस घटना से ज्ञात होता है कि सीता राजा जनक की अपनी पुत्री नहीं थीं। धरती के अंदर छुपे कलश से प्राप्त होने के कारण सीता खुद को पृथ्वी की पुत्री मानती थीं। लेकिन वास्तव में सीता के पिता कौन थे और कलश में सीता कैसे आयीं, इसका उल्लेख अलग-अलग भाषाओं में लिखे गये रामायण और कथाओं से प्राप्त होता है। ‘अद्भुत रामायण’ में उल्लेख है कि रावण कहता है कि- “जब मैं भूलवश अपनी पुत्री से प्रणय की इच्छा करूँ, तब वही मेरी मृत्यु का कारण बने।” रावण के इस कथन से ज्ञात होता है कि सीता रावण की पुत्री थीं। ‘अद्भुत रामायण’ में उल्लेख है कि गृत्स्मद नामक ब्राह्मण लक्ष्मी को पुत्री रूप में पाने की कामना से प्रतिदिन एक कलश में कुश के अग्र भाग से मंत्रोच्चारण के साथ दूध की बूंदें डालता था। एक दिन जब ब्राह्मण कहीं बाहर गया था, तब रावण इनकी कुटिया में आया और यहाँ मौजूद ऋषियों को मारकर उनका रक्त कलश में भर लिया। यह कलश लाकर रावण ने मंदोदरी को सौंप दिया। रावण ने कहा कि यह तेज विष है। इसे छुपाकर रख दो। मंदोदरी रावण की उपेक्षा से दुःखी थी। एक दिन जब रावण बाहर गया था, तब मौका देखकर मंदोदरी ने कलश में रखा रक्त पी लिया। इसके पीने से मंदोदरी गर्भवती हो गयी। कुछ समय बाद रावण को मंदोदरी से एक पुत्री प्राप्त हुई जिसे उसने जन्म लेते ही सागर में फेंक दिया। सागर में  डूबती वह कन्या सागर की देवी वरुणी को मिली और वरुणी ने उसे धरती की देवी पृथ्वी को सौंप दिया और देवी पृथ्वी ने उस कन्या को राजा जनक और माता सुनैना को सौंप दिया,जिसके बाद वह कन्या सीता के रूप में जानी गई और बाद में इसी सीता के अपहरण के कारण भगवान राम ने रावण का वध किया .

वास्तव में सीता रावण और मंदोदरी की बेटी थी इसके पीछे बहुत बड़ा कारण थी वेदवती ।  सीता वेदवती का पुनर्जन्म थी । वेदवती एक बहुत सुंदर, सुशिल धार्मिक कन्या थी जो कि भगवान विष्णु की उपासक थी और उन्ही से विवाह करना चाहती थी। अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए वेदवती ने कठिन तपस्या की । उसने सांसारिक जीवन छोड़ स्वयं को तपस्या में लीन कर दिया था। वेदवती उपवन में कुटिया बनाकर रहने लगी .

एक दिन वेदवती उपवन में तपस्या कर रही थी. तब ही रावण वहां से निकला और वेदवती के स्वरूप को देख उस पर मोहित हो गया और उसने वेदवती के साथ दुर्व्यवहार करना चाहा, जिस कारण वेदवती ने हवन कुंड में कूदकर आत्मदाह कर लिया और वेदवती ने ही मरने से पूर्व रावण को श्राप दिया कि वो खुद रावण की पुत्री के रूप में जन्म लेगी और रावण की मृत्यु का कारण बनेगी।

सीता नवमी  ( जानकी जयंती ) महात्म्य कथा


सीता नवमी की पौराणिक कथा के अनुसार मारवाड़ क्षेत्र में एक वेदवादी श्रेष्ठ धर्मधुरीण ब्राह्मण निवास करते थे। उनका नाम देवदत्त था। उन ब्राह्मण की बड़ी सुंदर रूपगर्विता पत्नी थी, उसका नाम शोभना था। ब्राह्मण देवता जीविका के लिए अपने ग्राम से अन्य किसी ग्राम में भिक्षाटन के लिए गए हुए थे। इधर ब्राह्मणी कुसंगत में फंसकर व्यभिचार में प्रवृत्त हो गई।

अब तो पूरे गांव में उसके इस निंदित कर्म की चर्चाएं होने लगीं। परंतु उस दुष्टा ने गांव ही जलवा दिया। दुष्कर्मों में रत रहने वाली वह दुर्बुद्धि मरी तो उसका अगला जन्म चांडाल के घर में हुआ। पति का त्याग करने से वह चांडालिनी बनी, ग्राम जलाने से उसे भीषण कुष्ठ हो गया तथा व्यभिचार-कर्म के कारण वह अंधी भी हो गई। अपने कर्म का फल उसे भोगना ही था।

इस प्रकार वह अपने कर्म के योग से दिनों दिन दारुण दुख प्राप्त करती हुई देश-देशांतर में भटकने लगी। एक बार दैवयोग से वह भटकती हुई कौशलपुरी पहुंच गई। संयोगवश उस दिन वैशाख मास, शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि थी, जो समस्त पापों का नाश करने में समर्थ है।

सीता (जानकी) नवमी के पावन उत्सव पर भूख-प्यास से व्याकुल वह दुखियारी इस प्रकार प्रार्थना करने लगी- हे सज्जनों! मुझ पर कृपा कर कुछ भोजन सामग्री प्रदान करो। मैं भूख से मर रही हूं- ऐसा कहती हुई वह स्त्री श्री कनक भवन के सामने बने एक हजार पुष्प मंडित स्तंभों से गुजरती हुई उसमें प्रविष्ट हुई। उसने पुनः पुकार लगाई- भैया! कोई तो मेरी मदद करो- कुछ भोजन दे दो।

इतने में एक भक्त ने उससे कहा- देवी! आज तो सीता नवमी है, भोजन में अन्न देने वाले को पाप लगता है, इसीलिए आज तो अन्न नहीं मिलेगा। कल पारणा करने के समय आना, ठाकुर जी का प्रसाद भरपेट मिलेगा, किंतु वह नहीं मानी। अधिक कहने पर भक्त ने उसे तुलसी एवं जल प्रदान किया। वह पापिनी भूख से मर गई। किंतु इसी बहाने अनजाने में उससे सीता नवमी का व्रत पूरा हो गया।

अब तो परम कृपालिनी ने उसे समस्त पापों से मुक्त कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से वह पापिनी निर्मल होकर स्वर्ग में आनंदपूर्वक अनंत वर्षों तक रही। तत्पश्चात् वह कामरूप देश के महाराज जयसिंह की महारानी काम कला के नाम से विख्यात हुई। उसने अपने राज्य में अनेक देवालय बनवाए, जिनमें जानकी-रघुनाथ की प्रतिष्ठा करवाई।

अत: सीता नवमी पर जो श्रद्धालु माता जानकी का पूजन-अर्चन करते है, उन्हें सभी प्रकार के सुख-सौभाग्य प्राप्त होते हैं। श्रीजानकी नवमी पर श्रीजानकी जी की पूजा, व्रत, उत्सव, कीर्तन करने से उन परम दयामयी श्रीमती सीता जी की कृपा हमें अवश्य प्राप्त होती है तथा इस दिन जानकी स्तोत्र, रामचंद्रष्टाकम्, रामचरित मानस आदि का पाठ करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। 

पूजन विधि 


जिस प्रकार हिन्दू धर्म  में ‘राम नवमी’ का महात्म्य है, उतना ही महत्व ‘जानकी जयंती’ या ‘सीता नवमी’ का भी है । सीता जयंती के उपलक्ष्य पर भक्तगण माता सीता  की उपासना करते हैं। परम्परागत ढंग से श्रद्धा पूर्वक पूजन अर्चन किया जाता है तथा सीता जी की विधि-विधान पूर्वक आराधना की जाती है। इस दिन व्रत का भी नियम बताया गया है जिसे करने हेतु व्रतधारी को व्रत से जुडे सभी नियमों का पालन करना चाहिए। इस पावन पर्व पर जो व्रत रखता है तथा भगवान रामचन्द्र जी सहित भगवती सीता का अपनी शक्ति के अनुसार भक्तिभाव पूर्वक विधि-विधान से सोत्साह पूजन वन्दन करता है, उसे पृथ्वी दान का फल, महाषोडश दान (16 महान दानों ) का फल, अखिल तीर्थ भ्रमण का फल और सर्वभूत दया का फल स्वतः ही प्राप्त हो जाता है।

 ‘सीता नवमी’ पर व्रत एवं पूजन हेतु अष्टमी तिथि को ही स्वच्छ होकर शुद्ध भूमि पर सुन्दर मण्डप बनायें। यह मण्डप सौलह, आठ अथवा चार स्तम्भों का होना चाहिए। मण्डप के मध्य में सुन्दर आसन रखकर भगवती सीता एवं भगवान श्रीराम की स्थापना करें। पूजन के लिए स्वर्ण, रजत, ताम्र, पीतल, काठ एवं मिट्टी इनमें से सामर्थ्य अनुसार किसी एक वस्तु से बनी हुई प्रतिमा की स्थापना की जा सकती है। मूर्ति के अभाव में चित्र द्वारा भी पूजन किया जा सकता है। नवमी के दिन स्नान आदि के पश्चात् जानकी-राम का श्रद्धापूर्वक पूजन करना चाहिए। पूजन में चावल, जौ, तिल आदि का प्रयोग करना चाहिए।   ‘श्री रामाय नमः’ तथा ‘श्री सीतायै नमः’ मूल मंत्र से प्राणायाम करना चाहिए। ‘श्री जानकी रामाभ्यां नमः’ मंत्र द्वारा आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, पंचामृत स्नान, वस्त्र, आभूषण, गन्ध, सिन्दूर तथा धूप-दीप एवं नैवेद्य आदि उपचारों द्वारा श्रीराम-जानकी का पूजन व आरती करनी चाहिए।इसके साथ रामचरित मानस से देवी सीता के प्राकट्य अथवा राम-जानकी विवाह प्रसंग का पाठ करना भी उत्तम है ।  दशमी के दिन फिर विधिपूर्वक भगवती सीता-राम की पूजा-अर्चना के बाद मण्डप का विसर्जन कर देना चाहिए। इस प्रकार श्रद्धा व भक्ति से पूजन करने वाले पर भगवती सीता व भगवान राम की कृपा प्राप्ति होती है।

इस दिन आठ सौभाग्यशाली महिलाओं को सौभाग्य की वस्तुएं भेंट करें। लाल वस्त्र का दान जानकी जयंती को किया जाए तो यह अतिशुभ होता है। अगर प्रतिमा निर्माण कर पूजन करें तो दूसरे दिन पवित्र जल में उसका विसर्जन कर देना चाहिए। चढ़ाए गए पुष्प आदि भी साथ ही विसर्जित करने चाहिए। इससे मां सीता जीवन के पाप-संताप और दुखों का निवारण कर सौभाग्य का वरदान देती हैं।

इस व्रत को करने से सौभाग्य सुख व संतान की प्राप्त होती है, माँ सीता लक्ष्मी का हैं इसकारण इनके निमित्त किया गया व्रत परिवर में सुख-समृ्द्धि और धन कि वृद्धि करने वाला होता है. एक अन्य मत के अनुसार माता का जन्म क्योंकि भूमि से हुआ था, इसलिए वे अन्नपूर्णा कहलाती है. माता जानकी का व्रत करने से उपावसक में त्याग, शील, ममता और समर्पण जैसे गुण आते है ।